Muttaki India Visit Analysis: “राष्ट्र आदर्शों से नहीं, हितों से चलते हैं. इस दुनिया में न तो कोई स्थाई दोस्त है, न स्थाई दुश्मन है…सिर्फ स्थाई बेचैनियां हैं” ये कथन दुनिया के मशहूर राजनीतिक विचारकों हांस मॉर्गेन्थाउ (Hans J. Morgenthau)और केनेथ वाल्ट्ज (Kenneth N. Waltz) का है. जो आज के समय में भारत और तालिबान के बीच बदलते रिश्ते को बेहतर परिभाषित करता है. अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमिर खान मुत्ताकी इस समय भारत की यात्रा पर हैं. साल 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद उनकी यह पहली भारत यात्रा है. भारत में मुत्तकी को मिले स्वागत ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा. जिसके बाद यह चर्चा चल रही है कि जिस तालिबान को भारत ने कभी मान्यता नहीं दी. पूरी दुनिया में जिसे आतंकवादी संगठन माना. अचानक से वो भारत के लिए इतना प्रिय कैसे हो गया. इसके पीछे कौन-कौन से कारण हैं. इसे समझने के लिए हमें पहले अफगानिस्तान और भारत के इतिहास के बारे में समझना होगा.
साल था 1999 और जगह था कंधार. इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 को आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया और उसे अफगानिस्तान के कंधार ले गए. उस समय अफगानिस्तान में तालिबान का शासन था और मुत्ताकी उस सरकार में मंत्री थे. तालिबान की सरकार को भारत ने कभी मान्यता नहीं दी थी. उस समय भारत ने तालिबान के शासन में एक ‘कूटनीतिक खालीपन’ महसूस किया.
जब तालिबान 2021 में दोबारा सत्ता में आया तो भारत ने व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया और तालिबान के साथ सीमित संपर्क शुरू किया. आज कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत और तालिबान के हित एक दूसरे को मिलते हैं.
अफगानिस्तान में बढ़ता ISIS का प्रभाव
तालिबान सरकार के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने अपने भारत दौरे के दौरान जोर देकर आतंकवाद का विरोध जताया. तालिबान अफगानिस्तान में बढ़ते ISIS (इस्लामिक स्टेट खुरासान) के प्रभाव को लेकर चिंतित दिख रहा है. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मुलाकात में मुत्ताकी ने ISIS को ना केवल अफगानिस्तान बल्कि पूरे विश्व के लिए खतरा बताया.
कुछ दिनों पहले अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान की सेना पर ISIS को मदद देने का आरोप लगाया था.
वहीं भारत को भी ISIS को लेकर जायज चिंताएं हैं. भारत के पूर्वी छोर और केरल जैसे राज्यों में ISIS का प्रभाव बढ़ रहा है. जिसको लेकर भारत सख्ती दिखा रहा है.
पाकिस्तान ला रहा करीब
तालिबान और भारत के बीच मजबूत होते रिश्ते में पाकिस्तान की बड़ी भूमिका नजर आ रही है. पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच कई मुद्दों को लेकर भारी तनाव है. हाल ही में तालिबान और पाकिस्तान की सेना के बीच डूरंड लाइन पर जमकर गोलीबारी हुई. जिसमें 12 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. जैसे-जैसे पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंधों की खाई गहरी हो रही है. अफगानिस्तान भारत के और करीब आ रहा है.
पहलगाम हमले के दौरान आतंकवादियों के द्वारा 26 लोगों की हत्या मामले में तालिबान भारत के साथ खड़ा दिखा और आतंकवाद को खत्म करने पर जोर दिया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी तालिबान भारत के साथ सहयोगी रवैया अपनाया.
पाकिस्तान का कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा इलाके में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) लगातार आतंकी हमलों को अंजाम दे रहा है. जिसे शह अफगान तालिबान दे रहा है. इसको लेकर पाकिस्तान ने काबुल पर हवाई हमले भी किये. जिसके परिणामस्वरूप अफगानिस्तान ने डुरंड लाइन पर पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाते हुए जबरदस्त फायरिंग की.
भारत की यात्रा पर आए अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने पाकिस्तान के इस आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि हम आतंकवाद को बढ़ावा नहीं देते. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की सीमा से हजारों किलोमीटर दूर बलूचिस्तान में भी हर दिन आतंकी हमले हो रहे हैं. ऐसा कैसे संभव है कि कोई व्यक्ति 500 किलोमीटर अंदर जाकर वहां हमले को अंजाम दे और सुबह तक अफगानिस्तान पहुंच आए.
अपने भारत दौरे के दौरान आमिर खान मुत्ताकी ने भारत को आश्वासन दिया कि तालिबान अफगान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ नहीं होने देगा. जो भारत के लिए एक राहत की बात है.
चीन और अमेरिका की अफगानिस्तान पर है नजर
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट रूप से अफगानिस्तान में मौजूद बगराम एयरबेस को अमेरिका को सौंपने की धमकी दी थी. जिसका अफगानिस्तान ने जबरदस्त विरोध जताया. तालिबान सरकार यह जानती है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी सिर्फ पाकिस्तानी मदद से ही संभव हो सकता है. जिसे काउंटर करने में तालिबान को भारत की कूटनीतिक मदद की जरूरत है.
वहीं अफगानिस्तान में चीन की बढ़ती मौजूदगी भारत के लिए खतरे की घंटी है. भारत ने अफगानिस्तान में कई सड़कों, डैम, स्कूलों और अस्पतालों में निवेश किया है. भारत लगातार अफगानिस्तान में अपना सहयोग बढ़ा रहा है. भारत को डर है कि पाकिस्तान की तरह कहीं अफगानिस्तान भी चीन के हाथों में ना चला जाए.
भारत-अफगानिस्तान के सहयोग से चाबहार बंदरगाह का विकास, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के लिए सीधा खतरा है. चाबहार भारत के लिए एक्स फैक्टर की भूमिका निभा सकता है. इसकी मदद से भारत बिना पाकिस्तान से गुजरे अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधे पहुंच सकता है. चीन की भी इसी पर नजर है. अपने भारत दौरे में मुत्ताकी ने चाबहार बंदरगाह पर भी टिप्पणी की.
संकट में है अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था
तालिबान का भारत के नजदीक आने के मुख्य कारणों में से एक अफगानिस्तान की खस्ताहाल होती अर्थव्यवस्था भी है. अफगानिस्तान को भारत जैसे बड़े आर्थिक और रणनीतिक साझेदार की जरूरत है. अफगानिस्तान में भारत ने पहले से ही कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश किया है.
भारत की स्वीकार्यता अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिला सकती है वैधता
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को रूस को छोड़कर दुनिया के किसी भी देश ने मान्यता नहीं दी है. तालिबान भारत जैसे एक प्रभावशाली देश के साथ संबंध बनाना चाहता है. जिससे उसे वैश्विक मंच पर उसे स्वीकार्यता दिलाने में मदद कर सकता है.
भारत के लिए अफगानिस्तान हमेशा से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और रणनीतिक साझेदार देश रहा है. तालिबान यह जानता है कि भारत के साथ उसके सकारात्मक संबंध उसे कई फायदे दिला सकता है. वहीं अफगानिस्तान में स्थिरता भारत के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है ताकि वहां से उत्पन्न होने वाले आतंकी गतिविधियों और खासकर पाकिस्तान समर्थित समूहों को रोकने में तालिबान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
-भारत एक्सप्रेस
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