Bharat Express DD Free Dish

पाक बॉर्डर पर अमेरिकी राजदूत की एंट्री से मचा बवाल, अमेरिकी एडमिरल ने क्यों की भारतीय सेना की तारीफ? ये है वजह

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध अब सरहद तक पहुंच चुका हैं. हाल ही में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और इंडो-पैसिफिक कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो ने भारतीय वेस्टर्न कमांड (चंडीगढ़) का दौरा किया, जो पाकिस्तान सीमा की निगरानी करता है.

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध अब सिर्फ कागजों या वॉशिंगटन के दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अब सरहद तक पहुंच गई है. हाल ही में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और इंडो-पैसिफिक कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो ने भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड (चंडीगढ़) का दौरा किया. यह एक सामान्य सा दौरा लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की टाइमिंग और लोकेशन ने देश की राजनीति में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है.

आखिर चंडीगढ़ कमांड ही क्यों?

चंडीगढ़ स्थित वेस्टर्न कमांड कोई साधारण सैन्य मुख्यालय नहीं है. यह जम्मू-कश्मीर के अखनूर से लेकर पंजाब के फाजिल्का तक फैली पाकिस्तान सीमा की निगरानी करता है और इसके अंडर करीब 200 सैन्य बेस आते हैं. पिछले साल जब ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान के आतंकी कैंपों और एयरबेस को निशाना बनाया गया था, तो उस पूरे मिशन की कमान इसी मुख्यालय के पास थी.

ऐसे में एक विदेशी डेलिगेशन का पाकिस्तान बॉर्डर के इतने करीब आना और उस जगह का मुआयना करना, जहां से दुश्मन पर स्ट्राइक की गई थी, अपने आप में बहुत बड़ा रणनीतिक संकेत है.

कांग्रेस और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार पर तीखा हमला बोला. उनका कहना है कि भारत अब अपनी रणनीतिक नीतियां खुद तय करने के बजाय अमेरिका के हिसाब से बना रहा है. विपक्ष ने ट्रंप के उस पुराने बयान की भी याद दिलाई जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाने का दावा किया था.

कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर कहा कि

“पहले सरकार ने पाकिस्तान की ISI को पठानकोट एयरबेस दिखाया और अब अमेरिका को ये बेहद संवेदनशील जगहें दिखाई जा रही हैं.”

हालांकि, सरकार और सेना के जानकारों का कहना है कि ऐसे मिलिट्री एक्सचेंज कोई नई बात नहीं हैं. भारतीय अधिकारी भी अक्सर पेंटागन और CIA हेडक्वार्टर जाते रहते हैं, यह आपसी भरोसे का हिस्सा है.

एडमिरल पापारो की तारीफ और संदेश

दौरे के दौरान अमेरिकी एडमिरल पापारो ने ऑपरेशन सिंदूर की जमकर तारीफ की है. उन्होंने इसे बेहद सटीक और शानदार ऑपरेशन बताया. लेकिन यह विजिट सिर्फ तारीफों और फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं थी. इसके कूटनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं. ट्रंप की नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटजी में पाकिस्तान का जिक्र तक ना होना और अमेरिकी अधिकारियों का भारतीय बॉर्डर पर आना बताता है कि अब पाकिस्तान अमेरिका की प्राथमिकता सूची से बाहर हो चुका है. अमेरिका चाहता है कि चीन के बढ़ते दबदबे को रोकने के लिए भारत एक मजबूत ‘काउंटर-बैलेंस’ की भूमिका निभाए.

अमेरिका चाहता है कि भारत हथियारों के लिए अपनी निर्भरता रूस से हटाकर उस पर करे. फिलहाल फ्रांस के बाद अमेरिका भारत का तीसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर बन चुका है.

यह भी पढ़ें: शिक्षा का मंदिर फिर हुआ शर्मसार! रामपुर के स्कूल में प्रिंसिपल पर लगा बच्चों से बदसलूकी का आरोप

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read