Iran Anti Khamenei Protests: ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता की नींव हिलती नजर आ रही है. आर्थिक संकट और महंगाई से त्रस्त जनता का गुस्सा अब एक हिंसक विद्रोह में बदल चुका है. पिछले 12 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों ने देश के 100 से ज्यादा शहरों को अपनी चपेट में ले लिया है. राजधानी तेहरान में हालात बेकाबू हैं. सरकारी दफ्तरों पर हमले हो रहे हैं, पुलिस की गाड़ियां फूंकी जा रही हैं और सैनिकों को घेरकर मारा जा रहा है.
बीते रोज प्रदर्शनकारियों ने खुजेस्तान के लाली शहर में आईआरजीसी कमांडर कासिम सुलेमानी की मूर्ति को भी आग के हवाले कर दिया है. वहीं लगातार उग्र हो रहे प्रदर्शन में अब तक 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. इसमें आम नागरिक और सुरक्षाकर्मी दोनों शामिल हैं.
एक्शन और इंटरनेट शटडाउन (Iran Internet Shutdown)
बढ़ते विद्रोह को कुचलने के लिए ईरानी सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं. तेहरान समेत कई हिस्सों में इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी गई हैं. यहां तक कि ईरान ने अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया है और तबरीज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानें निलंबित हैं. सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है.
पुलिसवालों की हत्या और मॉब लिंचिंग (Iran Anti-Khamenei Protests)
प्रदर्शन अब खूनी रूप ले चुका है. ईरान में पिछले दो दिनों में दो पुलिस अफसरों की हत्या कर दी गई है. एक दिल दहला देने वाली घटना में अज्ञात हमलावरों ने गाड़ी का पीछा कर एक पुलिस कमांडर को गोलियों से भून दिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसके अलावा, कई जगहों से पुलिसकर्मियों की मॉब लिंचिंग की खबरें और तस्वीरें सामने आई हैं. लोरडेगन शहर में पुलिस अधिकारियों पर गोलियां चलाई गईं, जिसमें दो की मौत हो गई.
नारेबाजी और शहरों पर कब्जा (Iran Civil War)
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सीधे सुप्रीम लीडर पर फूट रहा है. सड़कों पर तानाशाह मुर्दाबाद और हमें मौलवियों का राज नहीं चाहिए के नारे गूंज रहे हैं. बड़े शहरों में प्रदर्शनकारियों ने हाईवे पर कब्जा कर लिया है. कुर्द इलाकों के चार प्रांतों (कुर्दिस्तान, पश्चिम अजरबैजान, केरमानशाह और इलाम) के 50 शहरों में बाजार पूरी तरह बंद हैं, जो विद्रोहियों के साथ एकजुटता दिखा रहे हैं.
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आर्थिक संकट और विदेशी हाथ?
ईरान एक बार फिर इतिहास के दोराहे पर खड़ा है. प्रदर्शन अब सिर्फ महंगाई का विरोध नहीं रहा, बल्कि यह सीधे तौर पर इस्लामिक रिपब्लिक के अस्तित्व को चुनौती दे रहा है. इस विद्रोह की मुख्य वजह देश की चरमराती अर्थव्यवस्था और महंगाई है, लेकिन अब यह राजनीतिक रूप ले चुका है. रिपोर्ट्स का दावा है कि ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों’ की आड़ में कुछ सशस्त्र गुट भी सक्रिय हैं. सरकार ने आरोप लगाया है कि मोसाद और पश्चिमी ताकतें इस आग को भड़का रही हैं. अस्तारा, रश्त और इलम जैसे शहरों में भी हिंसक झड़पें जारी हैं.
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