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ईरान-इजरायल युद्ध से हिल रही दुनिया, क्या 2027 तक महंगाई और मंदी का तूफान आएगा, वर्ल्ड बैंक ने क्या चेतावनी दी?

US Israel Iran conflict: ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है. विश्व बैंक और OECD की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो महंगाई और सप्लाई चेन संकट और गहरा होगा.

US Israel Iran conflict: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा. अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीदें अधूरी ही रह गईं और इसी बीच इजरायल-ईरान के बीच फिर से शुरू हुई जंग ने हालात और बिगाड़ दिए. 28 फरवरी को शुरू हुआ यह संघर्ष अब 100 दिन पार कर चुका है और इसका असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.

विश्व बैंक और OECD की चेतावनी

विश्व बैंक के नए आंकड़े और OECD की रिपोर्ट साफ बता रहे हैं कि अगर यह युद्ध लंबा चलता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा दबाव पड़ेगा. शिपिंग कंपनी मेर्स्क ने भी चेतावनी दी है कि संघर्ष जारी रहा तो व्यापारिक लागत और महंगाई दोनों बढ़ेंगी.

सप्लाई चेन पर असर

ग्लोबल सप्लाई चेन स्ट्रेस इंडेक्स तेजी से ऊपर जा रहा है. यह इंडेक्स कंटेनर शिपिंग में देरी को मापता है. मई 2026 तक देरी से फंसी शिपिंग क्षमता 2.06 मिलियन TEU तक पहुंच गई है. यह स्तर कोविड-19 के बाद देखी गई बड़ी बाधाओं के करीब है.

शिपिंग कंपनियों की मुश्किलें

मेर्स्क जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियों का कहना है कि युद्ध की वजह से उनकी लागत हर महीने लगभग 500 मिलियन डॉलर बढ़ रही है. ईंधन की कीमतें और महंगा इंश्योरेंस इसका बड़ा कारण हैं. कंपनी ने कहा कि अगर ट्रेड रूट्स में रुकावट जारी रही तो इसका असर सिर्फ शिपिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार पर निर्भर कंपनियों को भी झेलना पड़ेगा.

महंगाई का खतरा

जब माल ढुलाई महंगी होती है तो कारोबारियों की लागत बढ़ जाती है. इसका असर कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक पर पड़ता है. कंपनियां मजबूरी में दाम बढ़ाती हैं और इसका बोझ ग्राहकों पर आता है. OECD ने चेतावनी दी है कि अगर ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार में व्यवधान लंबे समय तक जारी रहा तो वैश्विक आर्थिक वृद्धि धीमी हो सकती है.

आर्थिक वृद्धि पर असर

OECD के जून 2026 आउटलुक के मुताबिक, दुनिया की अर्थव्यवस्था 2026 में 2.8% और 2027 में 3.1% की दर से बढ़ेगी. लेकिन अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो यह अनुमान और नीचे जा सकता है.

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2027 तक जारी रहा संघर्ष तो संकट गहराएगा

OECD का कहना है कि सिर्फ तेल की कीमतें ही नहीं, बल्कि ऊर्जा लागत, शिपिंग खर्च और वित्तीय बाजारों की अनिश्चितता मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को कमजोर कर सकती हैं. अगर यह युद्ध 2027 तक चलता रहा तो ऊर्जा और खाद की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी और महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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