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जीत गया ईरान! महायुद्ध के 40वें दिन ‘अल्प विराम’, जानें तेहरान के 10 प्वाइंट में कैसे चूर हुआ डोनाल्ड ट्रंप का घमंड?

40 दिन तक चले तनाव के बाद अमेरिका-ईरान के बीच 14 दिन का युद्धविराम हुआ, लेकिन शर्तों में ईरान का दबदबा दिख रहा है. Strait of Hormuz पर नियंत्रण और 10 शर्तों ने ट्रंप प्रशासन को बैकफुट पर ला दिया है…

Iran US ceasefire Trump Hormuz Strait deal: खाड़ी क्षेत्र में पिछले 40 दिनों से सुलग रही बारूद की गंध अब कुछ ठंडी पड़ती दिख रही है. दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़ा करने वाला अमेरिका-ईरान संघर्ष फिलहाल 14 दिनों के ‘सीजफायर’ (युद्धविराम) पर आकर रुक गया है. हालांकि व्हाइट हाउस इस समझौते को अपनी ‘सैन्य जीत’ का नतीजा बता रहा है, लेकिन हकीकत की परतें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं. तेहरान ने अपनी शर्तों पर होर्मुज स्ट्रेट खोलने का फैसला कर यह साफ कर दिया है कि 40 दिन तक आग उगलने वाले डोनाल्ड ट्रंप का ‘घमंड’ आखिर तेहरान के कड़े रुख के आगे झुकने पर मजबूर हो गया है.

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान: शर्तें भी तेहरान की, रास्ता भी उनका

सीजफायर के तहत सबसे बड़ा सवाल ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को लेकर था. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि होर्मुज से जहाजों को निकलने का रास्ता तो मिलेगा, लेकिन वह पूरी तरह ईरानी सेना की निगरानी और समन्वय (Coordination) के अधीन होगा. यानी समंदर के उस सबसे महत्वपूर्ण रास्ते की चाबी अभी भी ईरान ने अपने पास ही रखी है. ईरान का कहना है कि अगर उसके खिलाफ हमले पूरी तरह रुकते हैं, तभी उनकी सेना रक्षात्मक मोड में रहेगी.

क्या हैं तेहरान के वो 10 प्वाइंट?

ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक ’10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव’ भेजा है, जो आने वाली बातचीत की मुख्य धुरी होगा. इन शर्तों को देखकर रक्षा विशेषज्ञ इसे ईरान की बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहे हैं:

  1. ईरान पर लगे सभी कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को तुरंत हटाया जाए.
  2. क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों से अमेरिकी सेना की पूरी तरह वापसी हो.
  3. होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का संप्रभु नियंत्रण बरकरार रहे.
  4. युद्ध में ईरान को जो नुकसान हुआ है, अमेरिका उसका हर्जाना (मुआवजा) भरे.
  5. यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के ईरान के अधिकार को दुनिया स्वीकार करे.
  6. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी पुराने प्रस्तावों को समाप्त किया जाए.
  7. भविष्य में अमेरिका दोबारा कभी हमला नहीं करेगा, इसकी लिखित गारंटी दी जाए.
  8. IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के ईरान विरोधी सभी प्रस्ताव खत्म हों.
  9. लेबनान में हिजबुल्लाह समेत अन्य मोर्चों पर जारी संघर्ष को पूरी तरह रोका जाए.
  10. इजरायल-ईरान संघर्ष को लेकर भविष्य की एक निष्पक्ष कार्ययोजना बनाई जाए.

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क्या वाकई ट्रंप ने कुछ हासिल किया?

भले ही व्हाइट हाउस इसे अपनी उपलब्धि बता रहा हो, लेकिन 14 दिनों का यह ब्रेक ट्रंप के उन दावों पर सवालिया निशान है जिसमें उन्होंने ‘सभ्यता मिटाने’ और ‘रिजीम चेंज’ की बात कही थी. तेहरान की इन 10 शर्तों ने वाशिंगटन को रक्षात्मक मोड पर ला दिया है. अब दुनिया की नजरें 10 अप्रैल को होने वाली इस्लामाबाद बैठक पर टिकी हैं, जहाँ यह तय होगा कि खाड़ी में शांति का सूरज उगेगा या यह सिर्फ एक और बड़े तूफान से पहले की खामोशी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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