Iran US Peace Proposal
Iran US Peace Proposal: ईरान ने अमेरिका की ओर से युद्ध खत्म करने के लिए दिए गए शांति प्रस्ताव पर अपना जवाब भेज दिया है. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, यह जवाब पाकिस्तान के जरिए भेजा गया है. पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले लड़ाई रोकने पर बात होगी, उसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.
इसी बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य से कुछ जहाजों को गुजरने की अनुमति भी दी गई है. कतर का एक गैस टैंकर सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर पाकिस्तान के पोर्ट कासिम की ओर बढ़ गया. यह 28 फरवरी के बाद पहला कतरी एलएनजी जहाज है, जिसने इस रास्ते से यात्रा की है. माना जा रहा है कि ईरान ने कतर और पाकिस्तान के साथ भरोसा बढ़ाने के लिए इसकी अनुमति दी.
इसके अलावा, पनामा का झंडा लगाए एक मालवाहक जहाज को भी ईरानी सेना ने तय किए गए रास्ते से गुजरने दिया. यह जहाज ब्राजील जा रहा था.
हालांकि मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है. रविवार को कई खाड़ी देशों के ऊपर ड्रोन देखे गए. संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि उसने ईरान की तरफ से आए दो ड्रोन को रोक दिया. वहीं, कतर ने अपने जलक्षेत्र में एक मालवाहक जहाज पर हुए ड्रोन हमले की निंदा की. कुवैत ने भी अपने हवाई क्षेत्र में घुसे ड्रोन को मार गिराने का दावा किया.
दुनिया के 20 प्रतिशत तेल सप्लाई पर संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. युद्ध से पहले दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती थी. युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने यहां गैर-ईरानी जहाजों की आवाजाही काफी हद तक रोक दी थी.
कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची से कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि समुद्री रास्तों की आजादी बनी रहनी चाहिए.
ट्रंप पर युद्ध खत्म करने का दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं. उससे पहले उनपर युद्ध खत्म करने का दबाव बढ़ रहा है. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति में भारी कमी आ गई है. लगातार बढ़ती तेल व गैस की कीमतों से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है.
अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों से जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने में मदद मांगी है, लेकिन कई देशों ने बिना शांति समझौते के सैन्य मिशन में शामिल होने से इनकार कर दिया है. ब्रिटेन ने जरूर कहा है कि वह क्षेत्र में एक युद्धपोत भेज रहा है ताकि भविष्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित की जा सके.
ये भी पढ़ें- बाढ़ और हीटवेव की आशंकाओं पर मोदी सरकार अलर्ट, गृह मंत्री अमित शाह ने की तैयारियों की बड़ी समीक्षा
फिलहाल, बातचीत और कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य और पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.





