21वीं सदी में दुनिया की नंबर-1 अर्थव्यवस्था बनेगा भारत
Jeffrey Sachs On India Economy: भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और बदलती वैश्विक भूमिका को लेकर अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफ्री सैक्स ने बड़ा अनुमान जताया है. कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सैक्स का मानना है कि आने वाले दशकों में भारत और चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में उभर सकते हैं. उन्होंने कहा कि भारत में आर्थिक विकास की मौजूदा रफ्तार बनी रही तो इस सदी के किसी चरण में वह दुनिया की नंबर एक अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता रखता है.
इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में सैक्स ने कहा कि आने वाले 25 वर्षों से भी कम समय में भारत और चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकते हैं. उनके अनुमान के मुताबिक, अमेरिका इस दौरान तीसरे स्थान पर रह सकता है. उन्होंने भारत की बड़ी आबादी और लगातार बढ़ती आर्थिक गतिविधियों को इसकी प्रमुख वजहों में शामिल किया.
भारत-चीन की आर्थिक ताकत बदल सकती है वैश्विक तस्वीर
जेफ्री सैक्स ने भारत और चीन के बीच बेहतर संबंधों को भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया. उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ता है तो इसका फायदा सिर्फ भारत और चीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ सकता है.
उन्होंने व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और वैश्विक सप्लाई चेन में दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल की संभावनाओं का जिक्र किया. सैक्स के मुताबिक, भारत की आर्थिक सफलता चीन के लिए भी फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि इससे वैश्विक शक्ति संतुलन ज्यादा बहुध्रुवीय हो सकता है.
हालांकि, भारत और चीन के बीच सीमा विवाद समेत कई मुद्दों पर मतभेद हैं. इसके बावजूद सैक्स का मानना है कि आर्थिक हितों के क्षेत्र में सहयोग के रास्ते तलाशे जा सकते हैं. दोनों देशों की आर्थिक ताकत बढ़ने से वैश्विक व्यवस्था में एशिया की भूमिका और मजबूत हो सकती है.
अमेरिका की एकतरफा नीतियों पर भी उठाए सवाल
अमेरिका की एकतरफा नीतियों को लेकर भी जेफ्री सैक्स ने सवाल उठाए. उन्होंने BRICS जैसे समूहों की बढ़ती भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक व्यवस्था अब पहले की तरह एकध्रुवीय नहीं रह गई है.
उनके मुताबिक अमेरिका के साथ चीन, भारत और रूस जैसे देश भी अब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र बन चुके हैं. ऐसे में आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय फैसलों पर कई देशों और समूहों का प्रभाव देखने को मिल सकता है.
एशिया की ओर लौट रहा वैश्विक आर्थिक केंद्र
सैक्स ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप पर भी अपनी राय रखी. उनका कहना है कि आर्थिक गतिविधियों का केंद्र धीरे-धीरे एक बार फिर एशिया की ओर बढ़ रहा है. भारत और चीन की बढ़ती आर्थिक ताकत इस बदलाव को और गति दे सकती है.
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अगर भारत आने वाले दशकों में अपनी आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बनाए रखता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी भूमिका और बड़ी हो सकती है. सैक्स के अनुमान के मुताबिक, इस सदी में भारत के दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. ऐसे में भारत-चीन के संबंध सिर्फ दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाले वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संतुलन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होंगे.
-भारत एक्सप्रेस
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