KP Sharma Oli Arrested: पड़ोसी देश नेपाल की राजनीति में शनिवार की सुबह एक ऐसा भूचाल लेकर आई, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी. नेपाल के सबसे कद्दावर और विवादित नेताओं में शुमार पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. यह कार्रवाई कोई मामूली नहीं है, बल्कि यह उन ‘खूनी यादों’ से जुड़ी है जिसने पिछले साल नेपाल की सड़कों को लाल कर दिया था. ओली के साथ-साथ पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है.
भक्तपुर के घर पर तड़के पड़ा छापा
जानकारी के अनुसार, नेपाल पुलिस ने शनिवार सुबह-सुबह भक्तपुर के गुंडू स्थित ओली के आवास पर छापेमारी की. वहां से उन्हें हिरासत में लेकर सीधे काठमांडू के डिस्ट्रिक्ट पुलिस रेंज ले जाया गया. गिरफ्तारी के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल ले जाया गया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने पिछले साल हुए ‘जेन-जी’ (Gen-Z) आंदोलन को कुचलने के लिए पुलिस को गोली चलाने के आदेश दिए थे, जिसमें दर्जनों मासूमों की जान चली गई थी.
कैसे छीनी ओली की कुर्सी?
ये कहानी शुरू होती है सितंबर 2025 में. नेपाल का युवा वर्ग भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए बैन के खिलाफ सड़कों पर उतर आया था. इसे ‘जेन-जी आंदोलन’ कहा गया क्योंकि इसमें 18 से 25 साल के युवाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा थी.
8 सितंबर 2025 को जब आक्रोशित युवाओं ने काठमांडू में संसद का घेराव किया, तब उस वक्त की ओली सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलवा दीं. देखते ही देखते लाशों के ढेर लग गए. पहले ही दिन 19 युवाओं की मौत हुई और आधिकारिक आंकड़ों की मानें तो कुल 77 लोग मारे गए. इस खूनी दमन के बाद जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और महज 24 घंटे के भीतर 9 सितंबर को ओली को इस्तीफा देना पड़ा. बाद में गठित एक जांच आयोग ने ओली को इन मौतों का मुख्य जिम्मेदार ठहराया.
कैसे हुआ ओली का पतन?
नेपाल की राजनीति में अब ‘बालेन युग’ की शुरुआत हो चुकी है. कभी रैपर रहे बालेन शाह ने न केवल युवाओं के दिलों में जगह बनाई, बल्कि मार्च 2026 के आम चुनावों में ओली को उनके ही गढ़ झापा-5 में धूल चटा दी. बालेन को 68 हजार से ज्यादा वोट मिले, जबकि दिग्गज कहे जाने वाले ओली महज 18 हजार वोटों पर सिमट गए. अब बालेन शाह देश के नए प्रधानमंत्री हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि युवाओं के खून का हिसाब कानून के जरिए लिया जाएगा.
जहां से शुरू हुआ सफर, वहीं हुआ खत्म
74 वर्षीय केपी शर्मा ओली का राजनीतिक सफर काफी फिल्मी रहा है. 1970 के दशक में राजतंत्र के खिलाफ बगावत करने पर वे 14 साल जेल में रहे थे. जेल से निकलकर वे देश के चार बार प्रधानमंत्री बने. लेकिन आज, 50 साल बाद इतिहास खुद को दोहरा रहा है. जिस नेता ने जेल काटकर सत्ता के शिखर को छुआ था, आज वही नेता अपने ही देश के युवाओं के दमन के आरोप में फिर से सलाखों के पीछे पहुंचने की कगार पर है.
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-भारत एक्सप्रेस
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