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‘अननोन गनमैन’ ने भारत के एक और दुश्मन को लगाया ठिकाना, जानें कैसे धुरंधर स्टाइल में ’72 हूरों’ के पास पहुंचा लश्कर कमांडर?

पाकिस्तान के मुरिदके स्थित मरकज तैयबा में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. ईद की नमाज के बाद हुए इस हमले ने आतंकी नेटवर्क और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं…

Bilal Arif Salafi killed Markaz Taiba Pakistan: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित मुरिदके का ‘मरकज तैयबा’ शनिवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा. बड़ी बात यह है कि इसे लश्कर-ए-तैयबा का सबसे सुरक्षित गढ़ और आतंकियों की नर्सरी माना जाता है. दरअसल ईद की नमाज के ठीक बाद कड़े सुरक्षा इंतेजामों के बाबजूद अज्ञात हमलावरों (Unkown Gunman) ने लश्कर के टॉप कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी को धुरंधर स्टाइल में मौत के घाट उतार दिया. जिसके बाद सोशल मीडिया पर हाल ही में रिलीज़ हुई धुरंधर 2 मूवी (dhurandhar 2) के ‘अननोन गनमैन’ के कांसेप्ट पर नई बहस छेद दी है.

सोशल मीडिया पर लोग कहते नज़र आ रहे हैं कि देखो कैसे रियल लाइफ में भी भारत के धुरंधर आतंकियों को 72 हूरों के पास भेजने का काम कर रहे हैं. भारत अब सिर्फ सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए ही अपने दुश्मनों को निशाना नहीं बनाता वरन् अब हमारे पास और भी विकल्प मौजूद हैं. यह भी ज्ञात रहे सलाफी की मौत लश्कर के लिए एक बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि वह केवल एक कमांडर नहीं, बल्कि संगठन के लिए भर्ती और ट्रेनिंग का मुख्य रणनीतिकार था.

कौन था बिलाल आरिफ सलाफी?

बिलाल आरिफ सलाफी लश्कर-ए-तैयबा के उन चेहरों में से एक था जो पर्दे के पीछे रहकर भारत के खिलाफ साजिशें बुनता था. वह संगठन में रिक्रूटमेंट हेड की भूमिका निभाता था और युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंकी विचारधारा से जोड़ने और ट्रेनिंग देने का काम करता था. ‘मरकज तैयबा’ में उसकी मौजूदगी ही उसकी ताकत का प्रमाण थी क्योंकि यह जगह लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का मुख्य केंद्र रही है.

भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने और लॉजिस्टिक्स तैयार करने में सलाफी का दिमाग चलता था. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उसकी मौत से लश्कर की नई भर्तियों और ट्रेनिंग मॉड्यूल को भारी नुकसान पहुंचेगा, जिससे सीमा पार से होने वाली घुसपैठ की कोशिशों पर लगाम लग सकती है.

‘धुरंधर’ स्टाइल में कैसे दिया गया वारदात को अंजाम?

इस हत्याकांड में हाल ही में रिलीज़ हुई धुरंधर(dhurandhar 2) मूवी के साथ जोड़कर देखा जा रहा है. इस मर्डर को जिस सफाई और निडरता से अंजाम दिया गया, उसने सुरक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है. शनिवार को जब पूरी दुनिया में ईद की रौनक थी तब हमलावर ‘मरकज तैयबा’ के भीतर दाखिल हुए. जैसे ही ईद की नमाज खत्म हुई तो हमलावरों ने सीधे बिलाल आरिफ सलाफी को टारगेट किया.

प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलावरों ने पहले उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं और जब वह जमीन पर गिर गया तो उन्होंने चाकू निकालकर उस पर कई घातक वार किए. बता दें कि यह हमला इतना सुनियोजित था कि वहां मौजूद सुरक्षा गार्डों को संभलने या जवाबी कार्रवाई करने का मौका ही नहीं मिला. हमलावर वारदात को अंजाम देकर गायब हो गए जो संगठन के भीतर किसी इनसाइडर यानी अंदरूनी सूत्र की मिलीभगत की ओर भी इशारा करता है.

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‘अननोन गनमैन’ ने किया एक और दुश्मन ढेर?

बिलाल आरिफ सलाफी की हत्या ने आतंकी नेटवर्क के भीतर अविश्वास की खाई पैदा कर दी है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह लश्कर के भीतर चल रही वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा है या फिर यह उन्हीं ‘अननॉन गनमैन'(dhurandhar) की कड़ी है जो पिछले कुछ समय से पाकिस्तान में छिपे भारत के दुश्मनों को एक-एक कर ठिकाने लगा रहे हैं. जिस तरह से परमजीत सिंह पंजवड़, शाहिद लतीफ और मुल्ला बहौर जैसे आतंकी पहले मारे गए हैं, सलाफी की हत्या का पैटर्न भी वैसा ही नजर आता है. मरकज तैयबा जैसे हाई-सिक्योरिटी जोन में घुसकर हत्या करना यह साबित करता है कि अब आतंकियों के लिए पाकिस्तान में कोई भी कोना सुरक्षित नहीं रह गया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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