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भारत-मालदीव का द्विपक्षीय व्यापार बीते 8 वर्षों में तीन गुना बढ़ा, मोदी सरकार के प्रयास रंग लाए

भारत और मालदीव के बीच व्यापार, पर्यटन और रणनीतिक सहयोग ने रिश्तों को नई ऊंचाई दी है.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

भारत और मालदीव का द्विपक्षीय व्यापार बीते आठ वर्षों में तीन गुना बढ़ा है. इस दौरान भारत का निर्यात दोगुना होकर वित्त वर्ष 2024-25 में 680 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया है, जबकि मालदीव से आयात 20 गुना बढ़कर 119 मिलियन डॉलर हो गया है. बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक मालदीव घूमने जाते हैं और इससे बीते कुछ वर्षों में दोनों देशों की एक-दूसरे पर निर्भरता काफी बढ़ी है.

मालदीव इनसाइट समाचार पोर्टल में प्रकाशित एक लेख के अनुसार,हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा के बाद भारत-मालदीव संबंधों में एक नया मोड़ आया है, जिसके दौरान आठ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए.

भारत–मालदीव समझौते से घटेगा कर्ज का बोझ

इन समझौतों में ऋण राहत भी शामिल है, जिससे मालदीव पर वार्षिक ऋण चुकौती का बोझ 40 प्रतिशत तक कम हो जाएगा. इसमें बुनियादी ढांचे के लिए 565 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन, यूपीआई-रुपे एकीकरण, मत्स्य पालन सहयोग, आवास परियोजनाएं, सुरक्षा सहायता, जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय और मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और निवेश संधि वार्ता को आगे बढ़ाना भी शामिल है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत द्वारा निर्यात की जाने वाली वस्तुएं, जिनमें पेट्रोलियम उत्पाद, दवाइयां और चावल, फल और सब्जियां जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं, मालदीव के लिए आर्थिक रूप से आवश्यक हैं. इसके अतिरिक्त, भारत द्वारा निर्यात की जाने वाली मशीनरी, विद्युत उपकरण और परिवहन वाहन मालदीव में उपभोक्ताओं की मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

मूल्य के हिसाब से भले ही मालदीव से आयात कम हो, लेकिन इसका रणनीतिक और आर्थिक महत्व है. भारत मुख्य रूप से मछली और समुद्री उत्पाद आयात करता है.

आपसी विश्वास ने दी रिश्तों को नई दिशा

लेख में कहा गया है कि पर्यटन भारत और मालदीव के बीच सबसे प्रत्यक्ष और गतिशील सेतु है. इसमें बताया गया है कि मालदीव में पर्यटकों के आगमन के मामले में भारत लगातार शीर्ष देशों में शुमार रहा है, जिससे पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को स्थिरता और मजबूती मिलती है, खासकर तब जब यूरोप या पूर्वी एशिया से आने वाले पर्यटकों की संख्या में उतार-चढ़ाव होता है.

लेख में यह भी कहा गया है कि भारत-मालदीव संबंध बुनियादी पड़ोसी संबंधों से विकसित होकर एक परिपक्व, बहुआयामी साझेदारी में तब्दील हो गए हैं, जो विश्वास, विकास और साझा दृष्टिकोण पर आधारित है.

लेख में आगे कहा गया है कि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते और द्विपक्षीय निवेश संधि के साथ भारत-मालदीव संबंधों का भविष्य और भी व्यापक होने की ओर अग्रसर है, जिनसे आर्थिक सहयोग मजबूत होने और निजी निवेश प्रवाह में वृद्धि होने की उम्मीद है.

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-भारत एक्सप्रेस



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