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Nepal Election Result Update: हिमालयी राष्ट्र नेपाल में सत्ता परिवर्तन की नई पटकथा लिखी जा चुकी है. गुरुवार (5 मार्च) को हुए मतदान के बाद जारी मतगणना में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने ऐतिहासिक बढ़त बना ली है. ताजा रुझानों और नतीजों के मुताबिक, बालेन शाह की पार्टी न केवल बहुमत के करीब है, बल्कि उसने नेपाल की स्थापित राजनीतिक व्यवस्था को जड़ से हिला दिया है.
बालेन शाह का ‘जायंट किलर’ अवतार (Nepal Election Balen Shah)
इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर झापा-5 सीट पर देखने को मिल रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री और कम्युनिस्ट नेता केपी शर्मा ओली, जो अपने इस गढ़ में कभी अजेय माने जाते थे, बालेन शाह से 10,000 से अधिक मतों से पीछे चल रहे हैं. Gen-Z विद्रोह के नायक बालेन शाह की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जो नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की रेस में सबसे आगे हैं.
नेपाल चुनाव में RSP की सुनामी
नेपाल चुनाव आयोग द्वारा शनिवार सुबह तक जारी आंकड़े जारी किए हैं. RSP के अध्यक्ष रबी लमिछाने ने चितवन-2 से 54,000 से अधिक वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की है. चुनाव आयोग के अनुसार, दोपहर 12 बजे तक संसद (प्रतिनिधि सभा) की तस्वीर कुछ इस प्रकार है. राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने अभी तक 24 सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं 102 सीटों पर आगे हैं. पार्टी के 126 सीट जातने की संभावना है. नेपाली कांग्रेस 5 सीटों पर जीत के साथ 11 सीटों पर आगे है. वहीं नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (UML) ने महज एक सीट जीती है और 10 सीटों पर आगे है.
क्यों हारी पारंपरिक पार्टियां?
- Gen-Z विद्रोह का असर: सितंबर 2025 में हुए युवा आंदोलन ने देश के मूड को बदल दिया था. भ्रष्टाचार और बेरोजगारी से तंग आए 10 लाख नए युवा वोटरों ने बालेन शाह को अपनी आवाज माना
- वामपंथ से मोहभंग: सालों तक सत्ता में रहने के बावजूद आम जनता की आर्थिक स्थिति में सुधार न होना कम्युनिस्ट पार्टियों के पतन का मुख्य कारण बना
- बालेन का ‘सेलिब्रिटी’ फैक्टर: एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर और मशहूर रैपर होने के नाते बालेन शाह ने खुद को एक ‘सिस्टम बिल्डर’ के रूप में पेश किया, जो युवाओं को रास आया
चुनौतियां और भविष्य (Nepal Election Update)
बालेन शाह भले ही प्रधानमंत्री बनने की दहलीज पर हैं, लेकिन उनके सामने बड़ी चुनौतियां हैं. आलोचकों का मानना है कि रैपर और इंजीनियर के रूप में सफल बालेन को जटिल कूटनीति (खासकर भारत और चीन के साथ संतुलन) और प्रशासन का अनुभव कम है. चुनाव प्रचार के दौरान बालेन ने मीडिया से दूरी बनाए रखी, जिससे उनके भावी शासन की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं.
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नेपाल अब एक नए युग में प्रवेश कर रहा है जहाँ सत्ता की चाबी ‘बूढ़े शेरों’ के हाथ से निकलकर ‘डिजिटल जेनरेशन’ के पास आ गई है. बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनना न केवल नेपाल बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए एक बड़ा संदेश है. हालांकि, स्पष्ट आंकड़े पूरे परिणाम जारी होने के बाद ही सामने आ पाएंगे.
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