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संसद में होगा ‘आर-पार’: क्या स्पीकर पद से हटेंगे ओम बिरला? जानें BJP-कांग्रेस की तैयारी

Parliament Budget Session 2026: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार, 9 मार्च से शुरू होने जा रहा है, लेकिन इसके पहले ही दिन सदन में ‘महा-संग्राम’ के आसार बन गए हैं. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के विपक्षी प्रस्ताव ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों खेमों में हलचल तेज कर दी है. आइये जानें सियासी दलों की क्या तैयारी है?

Parliament Budget Session 2026 Om Birla No Confidence Motion

Parliament Budget Session 2026: सोमवार को संसद खुलते ही भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक दुर्लभ दृश्य देखने को मिल सकता है. विपक्ष द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होनी है. इस टकराव की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने अपने सांसदों को 9 से 11 मार्च तक अनिवार्य रूप से सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है.

कांग्रेस और विपक्ष की घेराबंदी

‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के 118 सांसदों ने ओम बिरला को हटाने का नोटिस दिया है. विपक्ष का दावा है कि बजट सत्र के पहले चरण में अध्यक्ष ने ‘खुलकर भेदभाव’ किया और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया.

कांग्रेस सांसद के. सुरेश, मोहम्मद जावेद और मल्लु रवि इस प्रस्ताव को पेश करेंगे. विपक्ष की कोशिश है कि सदन में एकजुटता दिखाकर सरकार को नैतिक रूप से बैकफुट पर लाया जाए. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 29 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जो विपक्ष की एकजुटता में एक बड़ी दरार को दर्शाता है.

बीजेपी की जवाबी रणनीति

बीजेपी इस प्रस्ताव को विपक्ष की ‘हताशा’ बता रही है और अपने अध्यक्ष के बचाव में पूरी ताकत झोंक दी है. बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है ताकि किसी भी मतदान की स्थिति में विपक्ष को करारी शिकस्त दी जा सके.

समझिए संसदीय गणित

नियमों के अनुसार, अध्यक्ष को हटाने के लिए साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है. मौजूदा लोकसभा में एनडीए के पास 290 से अधिक सांसदों का समर्थन है, जबकि प्रस्ताव पारित करने के लिए प्रभावी सदस्य संख्या का बहुमत चाहिए. ऐसे में गणितीय रूप से इस प्रस्ताव का गिरना लगभग तय माना जा रहा है.

सांसदों के बीच बैठेंगे ओम बिरला

जब इस प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होगी, तब संसदीय परंपरा के अनुसार एक अनोखा नजारा दिखेगा. चर्चा के दौरान ओम बिरला स्पीकर की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे. वे सत्तापक्ष की अग्रिम पंक्ति में अन्य सांसदों के बीच बैठेंगे. उन्हें अपने खिलाफ लगे आरोपों पर सफाई देने और प्रस्ताव पर मतदान करने का पूरा अधिकार होगा. हालांकि, वे डिजिटल वोटिंग के बजाय पर्ची के जरिए अपना वोट डालेंगे.

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प्रस्ताव का भविष्य और नियम

  • संविधान का अनुच्छेद 94 और 96 के तहत प्रस्ताव आया है
  • इसके पास होने के लिए सदन की प्रभावी सदस्य संख्या का साधारण बहुमत जरूरी है
  • 14 दिन पहले सूचित करना अनिवार्य है जो पूरा हो चुका है
  • अब तक जीवी मावलंकर और बलराम जाखड़ जैसे अध्यक्षों ने अविश्वास का सामना किया, पर कोई हटा नहीं

सोमवार का दिन केवल एक प्रस्ताव पर चर्चा का नहीं, बल्कि सदन में शक्ति प्रदर्शन का होगा. जहाँ कांग्रेस इस मौके का इस्तेमाल ‘लोकतंत्र बचाने’ के नैरेटिव के लिए करना चाहती है, वहीं बीजेपी इसे विफल कर विपक्ष की एकजुटता की कमियों (जैसे TMC का अलग रहना) को उजागर करने की तैयारी में है.



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