Sushila Karki Love Story: नेपाल इन दिनों राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहा है. सत्ता संकट और युवाओं के गुस्से ने मिलकर ऐसा माहौल बना दिया है कि अब अंतरिम प्रधानमंत्री की चर्चा तेज हो गई है. इस दौड़ में जो नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है, वह है नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की का है. सुशीला कार्की का नाम किसी राजनीतिक दल ने नहीं बल्कि सड़क पर आंदोलन कर रहे Gen-Z युवाओं ने आगे बढ़ाया है.
यह विडंबना ही कही जाएगी कि जिस सुशीला कार्की को आज अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने की मांग उठ रही है, उन्हें कभी प्रधानमंत्री ने ही देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया था. लेकिन क्या आप जानते हैं सुशीला कार्की का भारत से भी गहरा नाता रहा है. उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है और वहीं पर उन्होंने प्यार का सही मतलब को जाना और समझा, फिर यही से शुरू हुई उनकी दिलचस्प लव स्टोरी…
भारत से गहरा रिश्ता और BHU की यादें
बहुत कम लोग जानते हैं कि पढ़ाई के लिए उन्होंने भारत को चुना था. 1975 में वाराणसी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की. यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया, क्योंकि वाराणसी में ही उनकी मुलाकात दुर्गा सुबेदी नाम के शख्स से हुई, जो आगे चलकर उनके हमसफर बने.
सुबेदी उस समय BHU में पढ़ाते थे. छात्रा और शिक्षक के बीच शुरू हुई पहचान समय के साथ दोस्ती और फिर रिश्ते में बदल गई. खुद सुशीला कार्की ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके पति हर कठिन घड़ी में भरोसेमंद साथी साबित हुए.
सुशीला कार्की के पति का प्लेन हाईजैक कनेक्शन
अब कहानी यहां और दिलचस्प हो जाती है. दुर्गा प्रसाद सुबेदी का नाम नेपाल के इतिहास की एक अहम घटना से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने 1973 का नेपाल एयरलाइंस हाईजैक किया था. उस वक्त नेपाल में लोकतंत्र की बहाली की लड़ाई तेज हो रही थी. कांग्रेस नेता गिरिजा प्रसाद (जीपी) कोइराला सशस्त्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे. आंदोलन के लिए हथियार खरीदने को बड़ी रकम की जरूरत थी. तभी जून 1973 में विराटनगर से काठमांडू जा रहे नेपाल एयरलाइंस के विमान को हाईजैक कर लिया गया. इस विमान में नेपाल के केंद्रीय बैंक के लिए करीब 40 लाख रुपये नकद भेजे जा रहे थे.
हाईजैकर्स विमान को भारत के बिहार के फारबिसगंज ले आए और वहां उतारकर सारी रकम निकाल ली गई. यह रकम कथित तौर पर कोइराला को सौंपी गई, जिसने लोकतांत्रिक आंदोलन को नई ताकत दी. आगे चलकर यही आंदोलन नेपाल में लोकतंत्र की वापसी का कारण बना और कोइराला चार बार प्रधानमंत्री बने. इस हाईजैक में चार लोगों के नाम सामने आए थे, जिनमें से एक दुर्गा प्रसाद सुबेदी थे. हालांकि सालों बाद उन्होंने हिंसक राजनीति से दूरी बना ली और शिक्षा व सामाजिक कामों में एक्टिव रहे. इसी सफर में उनकी जिंदगी सुशीला कार्की से जुड़ी और दोनों जीवनभर के साथी बन गए.
बिराटनगर से काठमांडू तक का सफर
सुशीला कार्की का जन्म बिराटनगर में हुआ. भारत से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह नेपाल लौटीं और त्रिभुवन विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की. इसके बाद न्यायिक सेवा में प्रवेश कर उन्होंने तेजी से अपनी पहचान बनाई. 2016 में वह नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं और अपने सख्त फैसलों से चर्चा में रहीं.
आज जब नेपाल राजनीतिक संकट से जूझ रहा है और युवा सड़कों पर उतरकर बदलाव की मांग कर रहे हैं, ऐसे में उनका नाम एक बार फिर सुर्खियों में है. आंदोलनकारी Gen-Z युवाओं का मानना है कि सुशीला कार्की जैसी निष्पक्ष और मजबूत शख्सियत ही देश को इस संक्रमण काल से निकाल सकती हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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