Pakistan Airstrike On Kabul: पाकिस्तान ने गुरुवार-शुक्रवार की रात अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर एयरस्ट्राइक की. जिसमें कई घरों के क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आ रही हैं. खास बात यह है कि पाकिस्तान ने यह हमला तब किया है जब अफगान तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भारत के दौरे पर हैं. आखिर क्यों पाकिस्तान का काबुल पर किये गए इस हमले को अप्रत्यक्ष तौर पर भारत पर हमला माना जा रहा है.
पाकिस्तान की इस हरकत ने ना सिर्फ अफगानिस्तान नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र की कूटनीति और सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है.
अफगानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान ने यह एयरस्ट्राइक काबुल शहर के मध्य और उत्तरी हिस्से में की. पाक एयरफोर्स के इस हमले में कई घरों को नुकसान पहुंचा है. पाकिस्तान के द्वारा अफगानिस्तान की राजधानी में हमले की पुष्टि तालिबान के प्रवक्ता ने भी की है.
अफगान तालिबान के प्रवक्ता ने की पुष्टि
अफगान तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि, काबुल शहर में एक विस्फोट की आवाज सुनाई दी है. घटना की जांच की जा रही है. घबराने या चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. अभी तक किसी नुकसान की रिपोर्ट नहीं मिली है. सब ठीक है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने साधा निशाना
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मुत्ताकी के भारत दौरे पर पाकिस्तान को तीखी मिर्ची लगी है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत-अफगान रिश्तों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, अफगान हमेशा भारत के वफादार रहे हैं. वे कल भी पाकिस्तान के खिलाफ थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे.
पाकिस्तानी विदेश मंत्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने पाकिस्तान में बसे शरणार्थियों को अमेरिकी साजिश तक करार दिया. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के शरणार्थियों को पाकिस्तान में बसाने का फैसला पूर्व की सरकारों ने अमेरिकी दबाव में किया.
इससे पहले पाकिस्तान नेशनल असेंबली में भी ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान को गीदड़-भभकी दी थी. जिसमें उन्होंने कहा था कि, अब बहुत हो गया है. हमारा सब्र अब जवाब दे चुका है. अब अफगानिस्तान की जमीन से पाकिस्तान को दहलाने की साजिश रचने को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
इस दौरान आसिफ ने अफगानिस्तान को भरोसे के लायक नहीं बताया. पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि 3 साल पहले वो पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ काबुल गए थे. जहां उन्होंने तालिबान से अफगानिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को बंद करने के लिए कहा था, लेकिन तालिबान ने कोई भरोसा नहीं दिया.
The Pakistan Army chief, Mullah Munir, delivered a speech and soon after, the #Pahalgam terrorist attack took place.
9 October 2025;
Today, shortly after Pakistan’s defense minister Khawaja Asif spoke, an explosion was reported in Kabul.In fact the defense minister’s comments… pic.twitter.com/Adnrnf5VIY
— Mir Yar Baloch (@miryar_baloch) October 9, 2025
इंडिया-अफगान रिश्ते से क्यों डरता है पाकिस्तान?
पाकिस्तान, हमेशा से भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों से खौफ खाता रहा है. 2021 में जब अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिक वापसी की तैयारी कर रहे थे. तो पाकिस्तान के मीडिया में भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों के विरोध में कई लेख लिखे जाते रहे. जिसमें दावा किया गया कि अगर भारत अफगानिस्तान में अपनी भूमिका कम कर दे या छोड़ दे, तो पाकिस्तान आश्वस्त हो जाएगा और अफगानिस्तान को स्थिर करने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद करेगा.
पाकिस्तान की विदेश नीति की जानकार और एक्सप्लेनिंग पाकिस्तान्स फॉरेन पॉलिसी: एस्केपिंग इंडिया किताब की लेखिका अपर्णा पांडेय कहती हैं कि, पाकिस्तान के नेताओं ने आजादी के बाद पाकिस्तान के लिए एक विचारधारा आधारित राष्ट्रीय पहचान गढ़ी. जिसके मूल में धार्मिकता और भारत विरोधी भावनाएं थी. इसलिए पाकिस्तान को अपने दो पड़ोसियों भारत और अफगानिस्तान से हमेशा से चुनौती महसूस हुई, क्योंकि दोनों के ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध समान थे. भारत और अफगानिस्तान के द्वारा अपने जातीय और भाषाई पहचानों पर जोर देने को पाकिस्तान हमेशा से शक की निगाहों से देखता है.
अपर्णा पांडेय आगे कहती हैं कि, पाकिस्तान के रणनीतिकारों को यह हमेशा से डर रहा है कि अगर भारत और अफगानिस्तान सहयोगी बन गए तो पाकिस्तान एक रणनीतिक घेरे में फंस जाएगा. ऐसी किसी स्थिति से बचने के लिए पाकिस्तान हमेशा से पाक समर्थक अफगान शासन का ख्वाब देखता आया है. पाक रणनीतिकार अफगान भारत के बीच किसी भी तरह के संबंधों को पाकिस्तान के लिए बेहद खतरनाक मानते हैं.
पाकिस्तान-अफगानिस्तान में तनावपूर्ण हैं हालात
अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद पाकिस्तान को ऐसा लगा कि तालिबान के आने से वह अफगानिस्तान में भारत के प्रभाव को खत्म कर देगा, लेकिन समय के साथ पाकिस्तान को यह पता लग गया कि तालिबान ऐसा नहीं करने वाला, विशेषकर तब जब उसे हर मोर्चे पर पश्चिमी प्रतिबंध की मार झेलनी पड़ रही थी. वहीं तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पर प्रतिबंध लगाने की पाकिस्तान की मांग पर भी अफगान तालिबान ने कोई समझौता नहीं किया.
अफगानिस्तान में पाकिस्तान की कूटनीतिक विफलता को देख TTP ने पाकिस्तान में हमले तेज कर दिये. आए दिन पाक सैनिकों की मौत ने पाकिस्तान को बैकफुट पर ला दिया. पाकिस्तान का कहना है कि टीटीपी के आतंकी पाकिस्तान में हमले को अंजाम देकर अफगानिस्तान चले जाते हैं. जिसकी वजह से उनपर कार्रवाई करने में परेशानी हो रही है. वहीं पाकिस्तान के इन आरोपों को अफगान तालिबान हमेशा से खारिज किया है.
फिलहाल अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुक्ताकी भारत के दौरे पर हैं. जहां वो भारत से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को मान्यता देने की मांग कर सकते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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