Asim Munir Controversy: पाकिस्तान की राजनीति में नया विवाद उस वक्त खड़ा हो गया जब जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को खुली चुनौती दे डाली. रहमान ने कहा कि अगर सेना को राजनीति करनी है तो वर्दी उतारकर अपनी पार्टी बनाए और चुनावी मैदान में उतरे.
जनसभा में तीखा बयान
एक जनसभा को संबोधित करते हुए रहमान ने कहा कि सेना का असली काम देश की सुरक्षा करना है, न कि सरकार बनाने या गिराने का फैसला करना. उन्होंने साफ कहा कि राजनीति में दखल देना सेना की जिम्मेदारी नहीं है और यह तय करना भी उनका काम नहीं कि सत्ता किसके हाथ में होगी.
मिलिशिया बनाने पर विरोध
रहमान ने आतंकवाद से निपटने के नाम पर आम नागरिकों को हथियार देने की मांग को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि वे खुद किसी तरह की मिलिशिया नहीं बनाएंगे क्योंकि आम लोगों के हाथ में हथियार आने से खून-खराबा और निजी दुश्मनी बढ़ने का खतरा है.
बलूचिस्तान और पश्तून इलाकों पर सवाल
अपने भाषण में रहमान ने दावा किया कि बलूचिस्तान के बड़े हिस्सों पर अब पाकिस्तान सरकार का असरदार नियंत्रण नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि पश्तून इलाकों में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और पिछले कुछ दिनों में ही वहां 50 से ज्यादा शव पहुंचे हैं.
जनता की मुश्किलें
रहमान ने आरोप लगाया कि इन इलाकों में लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे. बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई है और मजदूर घर से बाहर निकलने से डर रहे हैं. उनके मुताबिक हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों के पास सिर्फ अपने परिजनों के लिए कफन खरीदने और उन्हें दफनाने का ही काम रह गया है.
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सेना की भूमिका पर नई बहस
यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तानी सरकार ने असीम मुनीर को जनसंख्या से जुड़े मुद्दों पर बनी एक बड़ी समिति में भी शामिल किया है. इससे सेना प्रमुख की भूमिका रक्षा से आगे बढ़कर नागरिक प्रशासन तक पहुंचने पर बहस तेज हो गई है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रहमान का यह बयान सेना की राजनीतिक भूमिका को लेकर पाकिस्तान में चल रही चर्चा को और भड़का सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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