Pakistan Chenab river flood
Pakistan Chenab river flood: पाकिस्तान में लगातार हो रही भारी मानसूनी बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. चेनाब नदी का जलस्तर बढ़ने से पंजाब प्रांत के कई हिस्सों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन इस प्राकृतिक आपदा के बीच एक बार फिर भारत पर आरोप लगाने का सिलसिला शुरू हो गया. पाकिस्तान के कुछ नेताओं और मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि भारत ने चेनाब नदी में पानी छोड़कर पाकिस्तान में बाढ़ की स्थिति पैदा की है.
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चेनाब नदी में जलस्तर बढ़ने की वजह भारत की ओर से पानी छोड़ा जाना नहीं, बल्कि जम्मू और आसपास के पहाड़ी इलाकों में हुई भारी मानसूनी बारिश है. उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान ऊपरी क्षेत्रों में तेज बारिश होने पर नदियों का जलस्तर बढ़ना एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे किसी साजिश से जोड़ना सही नहीं है.
इस पूरे मामले की सबसे दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान की अपनी सरकारी संस्था ने भी इसी तथ्य की पुष्टि की है. लाहौर स्थित फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन ने 22 जुलाई को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया था कि चेनाब नदी और मराला क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने का मुख्य कारण जम्मू और ऊपरी कैचमेंट क्षेत्रों में हुई भारी बारिश है. यानी पाकिस्तान की आधिकारिक रिपोर्ट प्राकृतिक कारणों की ओर इशारा करती है, जबकि कुछ राजनीतिक बयान भारत पर आरोप लगाने की कोशिश कर रहे हैं.
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दोनों देशों के बीच सवाल-जवाब
पाकिस्तान ने यह सवाल भी उठाया कि भारत ने समय रहते बाढ़ की चेतावनी क्यों नहीं दी. इस पर भारत ने स्पष्ट किया कि नदी का जलस्तर उस स्तर तक नहीं पहुंचा था, जहां किसी विशेष आपातकालीन चेतावनी की आवश्यकता होती. साथ ही भारत ने दोहराया कि वह एक जिम्मेदार पड़ोसी देश के रूप में मानवीय आधार पर आवश्यक जल संबंधी जानकारी तय कूटनीतिक माध्यमों से साझा करता रहा है और भविष्य में भी करता रहेगा.
फिलहाल दोनों देशों के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है. हालांकि उपलब्ध आधिकारिक जानकारी यही संकेत देती है कि चेनाब नदी में जलस्तर बढ़ने की मुख्य वजह भारी मानसूनी बारिश थी. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक आपदाओं को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बनाने के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों और आधिकारिक रिपोर्टों के आधार पर स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए.
-भारत एक्सप्रेस
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