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भूख से मर जाएगा पाकिस्तान? ईरान बॉर्डर बंद होते ही गैस की किल्लत, दाम सुन उड़ जाएगा होश

Pakistan LPG Crisis: पाकिस्तान और ईरान के बीच प्रमुख सीमा क्रॉसिंग बंद होने के बाद पाकिस्तान में एलपीजी की भारी कमी पैदा हो गई है.

Will Pakistan die of hunger?

भूख से मर जाएगा पाकिस्तान?

Pakistan LPG Crisis: अक्टूबर 2026 के बीच पाकिस्तान और ईरान के बीच स्थित दो अहम सीमा चौकियां, गब्द-रिमदान और तफ्तान, अचानक बंद हो गईं. 17 अक्टूबर को उठाए गए इस कदम ने दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार पर सीधा असर डाला. बलोचिस्तान प्रशासन ने इसके पीछे सुरक्षा संबंधी चिंताओं और तस्करी रोकने की जरूरत बताई, जबकि ईरान की ओर से तकनीकी कारणों का हवाला दिया गया. इस दौरान कुछ रिपोर्ट्स में अमेरिकी दबाव और संभावित प्रतिबंधों की चर्चा भी हुई, लेकिन पाकिस्तान ने ऐसी अटकलों को खारिज कर दिया.

एलपीजी सप्लाई पर पड़ा सीधा असर

सीमा बंद होने का सबसे बड़ा झटका पाकिस्तान की एलपीजी आपूर्ति को लगा. पाकिस्तान हर दिन ईरान से लगभग 7,000 मीट्रिक टन एलपीजी मंगाता है. इसमें अकेले गब्द-रिमदान सीमा मार्ग से 4,000 मीट्रिक टन से अधिक गैस पहुंचती थी. रास्ता बंद होने के बाद दोनों देशों की सीमा पर सैकड़ों टैंकर अटक गए. ईरान की तरफ 4,500 मीट्रिक टन से ज्यादा एलपीजी फंसी रह गई. इसके चलते बाजार में गैस की उपलब्धता अचानक घट गई और कीमतों में तेज बढ़ोतरी शुरू हो गई.

आयात पर ज्यादा निर्भर है पाकिस्तान

पाकिस्तान की कुल वार्षिक एलपीजी जरूरत लगभग 20 लाख टन है. इसमें से करीब 70 फीसदी हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है. देश में खुद का उत्पादन केवल 30 फीसदी है, जो प्रतिदिन करीब 2,000 से 2,500 टन के बीच रहता है. बाकी जरूरत पूरी करने के लिए पाकिस्तान लंबे समय से ईरान पर निर्भर रहा है. कम दूरी और तुलनात्मक रूप से कम लागत के कारण ईरानी गैस प्रमुख स्रोत बनी हुई थी. समुद्री मार्ग से आयात सीमित होने के कारण जमीनी रास्ता पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण था.

आंशिक राहत लेकिन गैस सप्लाई अब भी प्रभावित

बाद में गब्द-रिमदान क्रॉसिंग को कुछ पाकिस्तानी उत्पादों, जैसे आलू और केले के निर्यात के लिए दोबारा खोल दिया गया. हालांकि एलपीजी की आवाजाही अभी भी सामान्य नहीं हो सकी है. दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन गैस की आपूर्ति पहले जैसी नहीं हो पाई. इसी बीच ठंड का मौसम करीब आने से मांग लगातार बढ़ रही है. पहाड़ी और दूर-दराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए खाना बनाने और घर गर्म रखने में एलपीजी की भूमिका बेहद अहम है.

कुछ ही दिनों में कीमतों में बड़ा उछाल

सीमा बंद होने के बाद घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई. 12 किलो वाले सिलेंडर का दाम 4,500 रुपये से बढ़कर करीब 7,000 रुपये तक पहुंच गया. कई शहरों में स्थिति और गंभीर रही. लाहौर में इसकी कीमत लगभग 7,500 रुपये तक पहुंच गई, जबकि स्कार्दू में यह 8,200 रुपये के आसपास बिकने लगी. कुछ क्षेत्रों से सामान्य कीमत से दोगुने दाम वसूलने की शिकायतें भी सामने आईं. व्यापारियों का कहना है कि यदि आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई तो कीमतों में और बढ़ोतरी संभव है.

आम लोगों की जेब पर बढ़ा बोझ

इस संकट का सबसे ज्यादा असर आम परिवारों पर पड़ रहा है. जो गैस पहले अपेक्षाकृत सस्ती मिल जाया करती थी, वह अब महंगी हो चुकी है. इससे घरेलू खर्च का संतुलन बिगड़ रहा है. कई इलाकों में जमाखोरी और कालाबाजारी की खबरें भी मिली हैं. दूसरी ओर ट्रांसपोर्टरों और कारोबारियों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है क्योंकि बड़ी संख्या में टैंकर और वाहन सीमा पर फंसे हुए हैं.

व्यापार और कूटनीति पर भी असर

यह मामला सिर्फ गैस आपूर्ति तक सीमित नहीं है. पाकिस्तान और ईरान के बीच अरबों डॉलर का व्यापार होता है. सीमा बंद होने से दोनों देशों के कारोबारी प्रभावित हुए हैं. पाकिस्तान को ईरान से अपेक्षाकृत सस्ती एलपीजी मिलती थी, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार दरों से कम रहती थी. अब समुद्री रास्तों या अन्य विकल्पों का सहारा लेना पड़ सकता है, जो अधिक महंगे और समय लेने वाले साबित हो रहे हैं.

सरकार के सामने बढ़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को घरेलू उत्पादन बढ़ाने, दूसरे देशों से आयात के विकल्प मजबूत करने और मूल्य निर्धारण प्रणाली में सुधार करने की जरूरत है. उद्योग जगत साप्ताहिक या दैनिक मूल्य निर्धारण व्यवस्था की मांग कर रहा है ताकि बाजार की वास्तविक स्थिति को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सके. साथ ही सुरक्षा और तस्करी नियंत्रण भी जरूरी हैं, लेकिन आम उपभोक्ताओं की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

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आगे क्या होगा?

पाकिस्तान और ईरान के बीच बातचीत जारी है और दोनों पक्ष समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं. यदि गैस आपूर्ति जल्दी सामान्य नहीं हुई तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है. खासकर कम आय वाले परिवारों पर इसका असर ज्यादा पड़ेगा. यह पूरा घटनाक्रम इस बात की याद दिलाता है कि किसी एक स्रोत और एक सीमा मार्ग पर अत्यधिक निर्भरता ऊर्जा सुरक्षा के लिए कितना बड़ा जोखिम बन सकती है. फिलहाल लोग सीमा पर सामान्य आवाजाही बहाल होने और गैस की कीमतों में राहत मिलने का इंतजार कर रहे हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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