सऊदी पर हूती हमलों के बीच पाकिस्तान की सैन्य भूमिका पर सवाल उठे
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच पिछले महीने 7 अगस्त को हुआ ऐतिहासिक ‘मक्का पैक्ट’ (Mecca Pact) अब पाकिस्तान के लिए ‘हाथी के दांत’ साबित हो रहा है. तीन मुस्लिम देशों के बीच रक्षा समझौते के बाद पाकिस्तान ने इसका ढोल पूरी दुनिया में पीटा था और इसे ‘इस्लामिक NATO’ का नाम दिया था. लेकिन यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए गए सिलसिलेवार हमलों ने इस कथित सैन्य गठबंधन की कलई खोलकर रख दी है.
पाकिस्तान बार-बार ढिंढोरा पीटता था कि समझौते के तहत ‘किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा’, लेकिन जब सऊदी अरब को वास्तविक सैन्य मदद (Pakistan Saudi Arabia Mecca Pact) की जरूरत पड़ी, तो पाकिस्तान ने मैदान छोड़कर सिर्फ फोन पर संवेदना जताने का आसान रास्ता चुन लिया.
सऊदी पर हूतियों का भयंकर हमला
रविवार को हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमलों की एक नई और खतरनाक लहर को अंजाम दिया. इराक की ओर से किए गए भीषण ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 1200 किलोमीटर लंबी ‘ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन’ को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा.
यह पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए जीवनरेखा है, क्योंकि यह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे बिना लाल सागर तक कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करती है. इसके साथ ही मोखा क्षेत्र में भी हूतियों के आक्रामक रुख ने सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है.
सैनिक भेजने के बजाय केवल ‘फोन’ पर छुट्टी
सऊदी अरब पर संकट आने के बावजूद ‘इस्लामिक नाटो’ का सबसे बड़ा दावेदार पाकिस्तान जमीनी मोर्चे से नदारद दिखा. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने बयान जारी कर बताया कि शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) से केवल फोन पर बातचीत की और अपनी ‘एकजुटता’ दिखाकर औपचारिकता पूरी कर ली.
शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के नागरिक और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूती हमलों की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे हमलों से ग्लोबल इकोनॉमी और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. फोन कॉल पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असिम मुनीर और उप-प्रधानमंत्री इशाक डार के शांति प्रयासों का जिक्र तो किया गया, लेकिन सऊदी की रक्षा के लिए पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती पर चुप्पी साध ली गई.
पाकिस्तान ने अपने पैर पर मारी कुल्हाड़ी?(Pakistan Saudi Arabia Mecca Pact)
7 अगस्त को हुए मक्का पैक्ट के तहत यह स्पष्ट प्रावधान था कि सदस्य देशों पर किसी भी सशस्त्र हमले का मिलकर मुकाबला किया जाएगा. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में बयान दिया था कि बिना उकसावे के हमले की स्थिति में मक्का पैक्ट के रक्षा प्रावधान लागू होंगे.
इस बयान के बाद दुनिया भर में अटकलें लगने लगीं कि पाकिस्तान अब हूतियों के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई करेगा. लेकिन असलियत सामने आते ही पाकिस्तान के पैर में कुल्हाड़ी पड़ गई. हूतियों के पलटवार और क्षेत्र के समीकरण बिगड़ने के डर से पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने तुरंत बयान जारी कर सफाई दी कि “फिलहाल किसी भी सैन्य कार्रवाई या सेना भेजने पर चर्चा नहीं हो रही है.
हूतियों के आगे बेबस दिखा इस्लामाबाद
पाकिस्तान की इस भारी पलटी (U-turn) ने यह साबित कर दिया है कि मक्का पैक्ट केवल रणनीतिक बड़बोलेपन और कागजी दावों तक सीमित है. जिस ‘आर्टिकल 5’ जैसी सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का दावा पाकिस्तान कर रहा था, वह हूतियों के पहले ही हमले में ताश के पत्तों की तरह ढह गई. यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ अपनी सेना भेजने की हिम्मत न जुटा पाने के कारण अंतरराष्ट्रीय पटल पर पाकिस्तान की सैन्य विश्वसनीयता और कूटनीतिक हैसियत पर गहरे सवाल खड़े हो गए हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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