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‘दो नावों’ की सवारी में पाकिस्तान: अमेरिका और चीन के बीच फंसा, क्या ‘डबल गेम’ में डूबेगा?

Pakistan Strategy Collapses: तुर्रम खां बनने वाला पाकिस्तान इन दिनों अपने डबल गेम में फंसता नजर आ रहा है. डोनाल्ड ट्रंप से दोस्ती और शी जिनपिंग से यारी कर अमेरिका और चीन की दो नाव की सवारी उसे भारी पड़ रही है.

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दो महाशक्तियों के बीच पाकिस्तान

Pakistan Strategy Collapses: भारत में एक कहावत है कि दो नावों की सवारी हमेशा खतरनाक होती है. यह कहावत इन दिनों तुर्रम खां बनने वाले हमारे पड़ोसी पाकिस्तान पर सच साबित हो रही है. बदल रहे वैश्विक परिदृश्य में वह अपने ही डबल गेम में फंस गया है. आजादी के बाद से ही पाकिस्तान अपनी भौगोलिक स्थिति का भरपूर फायदा उठाते हुए अमेरिका और चीन दोनों से दोस्ती यारी बनाए रखी. कई बार इसका इस्तेमाल उसने भारत के खिलाफ किया. कभी वह अमेरिका का खास दोस्त बना तो कभी चीन के साथ CPEC नाच करने लगा.

अब दुनिया के हालत बदले तो पाकिस्तान का दोगलापन (Pakistan Two Boat Ride) उसे भारी पड़ने लगा है. क्योंकि दोनों महाशक्तियां उससे साफ-साफ वफादारी चाहती हैं. कभी वह अपनी आदत को सियासी ‘शतरंज की चाल’ बताता था. आज वह उसी चक्रव्यूह में फंसा रही है. अब न तो डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती और न ही शी जिनपिंग दोनों ही उसके काम नहीं आ रही है.

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माओ के जमाने से यही कर रहा है पाक

पाकिस्तान ने अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर दोनों महाशक्तियों से लाभ उठाने की रणनीति अपनाई है. उसने शीत युद्ध के दौरान पश्चिमी सैन्य गठबंधनों में शामिल होकर और साथ ही साथ माओ के चीन को मान्यता देकर दोनों के साथ संबंध बनाए रखे. अब पाकिस्तान दो वैश्विक महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बीच एक खतरनाक स्थिति में फंस गया है. उसकी पारंपरिक रणनीति दोनों पक्षों के साथ संबंध बनाए रखने की अब खतरे में पड़ती दिख रही है, क्योंकि वाशिंगटन और बीजिंग दोनों उससे स्पष्ट साथ की मांग कर रहे हैं.

दोहरी रणनीति पड़ रही भारी (Pakistan Strategy)

अमेरिका ने पाकिस्तान पर 19% का टैरिफ लगाया है, लेकिन वहां की सरकार संकेत दे रही है कि अगर पाकिस्तान सहयोग करता है तो उसे विशेष राहत दी जा सकती है. दूसरी ओर, चीन पाकिस्तान से अपने नागरिकों और CPEC परियोजनाओं की सुरक्षा की मांग कर रहा है और अगर पाकिस्तान अमेरिकी एजेंडे के साथ खुलकर सहयोग करता है तो वह अपनी प्रतिबद्धताओं पर पुनर्विचार कर सकता है.

पाकिस्तान की चुनौती

पाकिस्तान के लिए अब एक असंभव विकल्प है. अगर वह अमेरिका की ओर झुकता है, तो चीन उसके साथ अपने रिश्ते कमजोर कर सकता है. वहीं अगर वह चीन की ओर झुकता है, तो अमेरिका उस पर टैरिफ बढ़ा सकता है और खुफिया सहयोग कम कर सकता है. लेकिन अगर वह निर्णय नहीं लेता है, तो दोनों महाशक्तियां उससे किनारा कर सकती हैं.

‘आगे कुआं पीछे खाई’

पाकिस्तान अब एक ऐसे दोराहे (Pakistan between US and China) पर आ खड़ा हुआ है, जहां उसे एक मुश्किल फैसला लेना होगा. दशकों तक दोनों हाथों में लड्डू रखने वाला पाकिस्तान अब एक ऐसी स्थिति में आ गया है, जहां उसके सामने आगे कुआं, पीछे खाई है. यह देखना दिलचस्प होगा कि वह किस तरह से इस मुश्किल से बाहर निकलता है, या फिर अपनी ही गलत चालों के जाल में फंसकर डूब जाता है.



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