PoK Voting Boycott: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के कोटली और मीरपुर इलाकों में आज तथाकथित चुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन जमीनी हकीकत ने पाकिस्तानी हुक्मरानों के ‘लोकतंत्र के ड्रामे’ की हवा निकाल दी है. जहां चुनाव के दिन वोटिंग केंद्रों पर लंबी-लंबी कतारें होनी चाहिए थीं, वहां सन्नाटा पसरा हुआ है. कई बूथों पर मतदान शुरू होने के घंटों बाद तक एक भी मतदाता वोट डालने नहीं पहुंचा. पिछले 50 दिनों से जारी भीषण अशांति और 50 से ज्यादा लोगों की मौत के बाद स्थानीय लोगों में भयंकर गुस्सा है.
सन्नाटे में तब्दील हुए पोलिंग बूथ
कोटली और मीरपुर के कई मतदान केंद्रों से सामने आई तस्वीरें चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं. कई पोलिंग स्टेशनों पर सुरक्षा बल तो तैनात दिखे, लेकिन मतदाता नदारद रहे. स्थानीय लोगों की कम रुचि और खाली पड़े बूथ यह साबित कर रहे हैं कि जनता ने इस चुनावी प्रक्रिया से पूरी तरह दूरी बना ली है और अपना विरोध दर्ज कराया है.
50 दिनों का खौफनाक दौर (PoK protests 50 deaths)
यह चुनाव किसी सामान्य माहौल में नहीं हो रहे हैं. पूरा पीओके पिछले लगभग 50 दिनों से विरोध-प्रदर्शनों, झड़पों और पुलिसिया बर्बरता की चपेट में है. बुनियादी सुविधाओं की किल्लत, महंगाई और सेना के अत्याचारों के खिलाफ सड़कों पर उतरे नागरिकों पर हुई हिंसक कार्रवाई में 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. इन घटनाओं ने स्थानीय आबादी के घावों को हरा कर दिया है, जिससे इलाके में भारी आक्रोश व्याप्त है.
बैकफुट पर पाकिस्तानी सरकार (PoK election news update)
चुनावी माहौल के बीच आज जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने “मुज़फ्फराबाद चलो” का बहुत बड़ा आह्वान किया है. समिति ने पीओके के कोने-कोने से लोगों को बड़ी संख्या में मुज़फ्फराबाद पहुंचकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की है. इस मार्च का असर सीधा मतदान पर पड़ा है, जहां लोग वोट डालने के बजाय मुज़फ्फराबाद की ओर रुख कर रहे हैं.
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चुनाव नतीजों से पहले ही पाकिस्तान पस्त (Pakistan On PoK Election)
तनावपूर्ण माहौल और बेहद कम वोटिंग प्रतिशत अब इस चुनाव का सबसे बड़ा सच बन चुके हैं. जानकारों का मानना है कि इस चुनाव का अंतिम मतदान प्रतिशत चाहे जो भी दिखाया जाए, लेकिन खाली बूथों ने यह संदेश साफ दे दिया है कि पीओके की जनता अब इस्लामाबाद के राजनीतिक छलावे को स्वीकार करने के मूड में नहीं है.
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