नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर 36 दिनों से देश में सुलग रही छात्र आंदोलन की आग अभी पूरी तरह बुझी भी नहीं थी कि सियासत में नया भूचाल आ गया है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के साथ हुए समझौते के महज 48 घंटे के भीतर ही इस ‘डील’ पर संकट के गहरे बादल छा गए हैं. इसे लेकर अब कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है.
48 घंटे में टूटा भरोसा
हाल ही में हुई उच्च स्तरीय वार्ता में केंद्र की तरफ से केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने लिखित और मौखिक आश्वासन दिया था कि प्रदर्शनकारियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी और दर्ज सभी एफआईआर (FIR) वापस ली जाएंगी.
ये भी पढ़ें: इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान तो क्या-क्या हुआ?
लेकिन धरातल पर कहानी बिल्कुल उलट है. असम, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों से लगातार खबरें आ रही हैं कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं को टारगेट कर रही हैं और ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां की जा रही हैं.
CJP का कड़ा अल्टीमेटम
इस खुली वादाखिलाफी से भड़की CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास (Saurav Dassss) ने मोदी सरकार को एक बेहद कड़ा और तीखा अल्टीमेटम जारी किया है. सौरव दास ने दो टूक शब्दों में कहा है कि-
“युवाओं ने देश में टकराव के बजाय संवाद का रास्ता चुनकर सरकार पर भरोसा जताया था. यदि सरकार अपने आश्वासनों से पीछे हटती है, तो यह उन लाखों युवाओं के सार्वजनिक विश्वास के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ होगा, जो सड़कों पर अपने हक के लिए लड़ रहे थे.”
लीगल टीम के साथ 28 जुलाई की डेडलाइन
विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार पर हमलावर है. वहीं, CJP ने साफ कर दिया है कि उनकी लीगल टीम ‘डे-1’ से ही देश के शीर्ष वकीलों के साथ मिलकर हिरासत में लिए गए छात्रों को कानूनी मदद दे रही है. CJP ने जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से सीधे अपील की है कि वे राज्य सरकारों को बदले की कार्रवाई रोकने का निर्देश दें.
28 जुलाई को होगा आर-पार?
CJP ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि यदि 28 जुलाई 2026 (मंगलवार) तक सभी छात्रों को रिहा नहीं किया गया और एफआईआर रद्द कर लिखित गारंटी नहीं दी गई, तो वे इस समझौते को रद्द मानेंगे. अब सबकी निगाहें 28 जुलाई पर टिकी हैं. क्या केंद्र सरकार राज्यों की पुलिसिया कार्रवाई पर रोक लगा पाएगी, या फिर देश भर में एक बार फिर से ‘सड़क की लड़ाई’ और जन-आंदोलन का शंखनाद होगा?
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

