अमेरिका में ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद भारतीयों के हालात बिगड़ते जा रहे हैं. पढ़ाई, नौकरी और बसने का सपना अब अधूरा लगता है. वीजा नियम सख्त हो गए हैं, वीजा रिजेक्शन बढ़ गया है और डिपोर्टेशन की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं.
वीजा मिलना मुश्किल
न्यूजर्सी में रहने वाले छात्रों का कहना है कि अब स्टूडेंट्स को वीजा एक्सटेंशन मिलना मुश्किल हो गया है. जो लोग तय समय से ज्यादा रुकते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है. नौकरी की हालत भी खराब है. बड़े कॉलेजों से पढ़ने के बाद भी छात्र बेरोजगार घूम रहे हैं.
H-1B वीजा के नियमों में बदलाव से कम सैलरी पर काम करने वाले भारतीयों को नुकसान हो रहा है. अब ये वीजा सिर्फ ज्यादा सैलरी वालों को मिलेगा. इससे कंपनियों को भी झटका लगा है क्योंकि सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स कम हो गए हैं और नौकरियां जा रही हैं.
सरकारी आंकड़ा क्या कहता है?
सरकारी आंकड़ों कि माने तो पिछले 6 महीने में 1703 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है. ये आंकड़ा बाइडेन सरकार की तुलना में तीन गुना ज्यादा है.
रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं का क्या कहना है?
रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े भारतीय मूल के नेताओं का कहना है कि अब माहौल इतना डरावना हो गया है कि लोग खुलकर बोलने से भी डरते हैं.
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ट्रम्प समर्थक भारतीयों को उम्मीद थी कि उनके समर्थन का फायदा मिलेगा लेकिन अब वे खुद पछता रहे हैं. अमेरिका में रहना, पढ़ना और नौकरी करना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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