Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

QUAD को प्रतिस्पर्धी नहीं पार्टनर के रूप में देखा जाना चाहिए: इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोको विडोडो

क्वाड (QUAD) में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं, जबकि ऑकस (Aukus) ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के बीच एक सुरक्षा साझेदारी है.

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो

QUAD: इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संघ (आसियान) के लिए क्वाड और ऑकस को “भागीदार ना कि प्रतिस्पर्धी ” बताया है. सिडनी में 24 मई को आयोजित क्वाड शिखर सम्मेलन से पहले इंडोनेशिया के इस बदलाव को भारत में एक सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है. भारत इंडोनेशिया के साथ एक सामान्य समुद्री सीमा साझा करता है. क्वाड (QUAD) में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं, जबकि ऑकस (Aukus) ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के बीच एक सुरक्षा साझेदारी है.

हम टकराव और अलगाव नहीं चाहते

जोको विडोडो ने इस सप्ताह मलेशिया के एक चैनल के साथ एक साक्षात्कार में कहा, “आसियान एकमात्र क्षेत्रीय संगठन है जो कूटनीति के विभिन्न रूपों की पेशकश करता है.” इसके आगे उन्होंने कहा कि “आसियान का सिद्धांत सहयोग, सहयोग और सक्रिय भागीदारी है. हम कोई टकराव नहीं चाहते. हम अलगाव नहीं चाहते हैं. वहीं उन्होंने कहा कि हमें क्वाड और औकस को भागीदारों के रूप में देखना चाहिए, न कि प्रतिस्पर्धियों के रूप में. जहां तक ​​इस क्षेत्र में कुछ भी घटित होता है तो आसियान का उद्देश्य इस क्षेत्र को स्थिर और शांतिपूर्ण बनाना है. इन दो तत्वों के बिना, आसियान के लोगों के लिए समृद्धि प्राप्त करना संभव नहीं है.”

जब ऑकस की पहली बार घोषणा की गई थी, तो इंडोनेशिया-दक्षिणपूर्व एशिया का सबसे बड़े देश- ने आपत्ति जताई थी कि इससे भारत-प्रशांत क्षेत्र में हथियारों की दौड़ हो सकती है. चीन क्वाड को नाटो के समान ब्लॉक के रूप में बताता रहा है, हालांकि क्वाड एक सैन्य गठबंधन नहीं है और भारत की इस क्षेत्र में सैन्य समझौते में प्रवेश करने की कोई योजना नहीं है.

इसे भी पढ़ें: महामारी के बाद अर्थव्यवस्था में भारत की मजबूत रिकवरी- जापान में बोलीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

विडोडो की टिप्पणी महतवपूर्ण

सिडनी क्वाड शिखर सम्मेलन से पहले विडोडो की टिप्पणी से क्वाड समूह और आसियान के बीच भविष्य में सहयोग का मार्ग प्रशस्त हो सकता है, जो भारत-प्रशांत क्षेत्र को स्थिर करेगा. “आसियान की स्थिति स्पष्ट है कि हम चाहते हैं कि दक्षिण चीन सागर एक ऐसा क्षेत्र हो जो स्थिर, शांतिपूर्ण और समृद्ध हो. सभी आसियान देश यही चाहते हैं. दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में चीन की आक्रामकता के परोक्ष संदर्भ में विडोडो ने कहा, आसियान क्षेत्र में स्थिरता की ओर बढ़ना जारी रखेगा.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital