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Axiom-4 Mission: अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के धरती पर वापस आने की नई तारीख आई सामने, जानें किस दिन स्पेस स्टेशन से होंगे रवाना

Ax-4 मिशन की शुरुआत 25 जून को फ्लोरिडा स्थित नासा के केनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39ए से स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट के ज़रिए हुई थी.

Shubhanshu Shukla

Axiom-4 मिशन.

 अंतरिक्ष में चल रहे एक्सिओम मिशन-4 (Ax-4) के चारों अंतरिक्ष यात्री, जिनमें भारत के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी शामिल हैं, 14 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से पृथ्वी पर लौटने के लिए रवाना होंगे. एक्सिओम स्पेस द्वारा साझा किए गए बयान के अनुसार, Ax-4 दल का ISS से विदाई कार्यक्रम सोमवार, 14 जुलाई को भारतीय समयानुसार लगभग शाम 4:30 बजे (सुबह 7:05 बजे ईस्टर्न टाइम) निर्धारित किया गया है.

14 जुलाई को स्पेस स्टेशन से रवाना होगा दल

एक्सिओम स्पेस ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में कहा, “Ax4 दल के सदस्य स्पेस स्टेशन से सोमवार, 14 जुलाई को सुबह 7:05 ET बजे से पहले विदा होंगे.” इससे पहले यह दल 10 जुलाई को ही पृथ्वी पर लौटने वाला था, लेकिन यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के अनुसार, अब उनकी वापसी कम से कम चार दिन आगे बढ़ा दी गई है.

Ax-4 मिशन की शुरुआत 25 जून को फ्लोरिडा स्थित नासा के केनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39ए से स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट के ज़रिए हुई थी. 26 जून को दोपहर 4:05 बजे (IST) ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने अंतरिक्ष स्टेशन के हार्मनी मॉड्यूल के स्पेस-फेसिंग पोर्ट से सफलतापूर्वक डॉक किया था, और वह निर्धारित समय से पहले ही जुड़ गया था.

अंतरिक्ष में किए कई प्रयोग

मिशन के दौरान दल के सदस्यों ने अंतरिक्ष में वैज्ञानिक अनुसंधानों, नई तकनीकों के परीक्षण, और वैश्विक जागरूकता अभियानों में हिस्सा लिया. Axiom Space के मिशन ब्लॉग के अनुसार, कमांडर पेगी व्हिटसन, पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु  शुक्ला, और मिशन विशेषज्ञ स्लावोस्ज़ सुएव उज़्नांस्की-विस्निएव्स्की व तिबोर कपु ने मिशन के प्रमुख वैज्ञानिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई. मंगलवार को दल ने सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (microgravity) पर शोध किया. ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने इस दिन तीन प्रयोग किए.

पहले प्रयोग में उन्होंने स्प्राउट्स प्रोजेक्ट पर कार्य किया, जिसमें यह देखा जा रहा है कि सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण बीजों की अंकुरण प्रक्रिया और प्रारंभिक पौध विकास को कैसे प्रभावित करता है. पृथ्वी पर लौटने के बाद, इन बीजों को कई पीढ़ियों तक उगाकर उनमें आनुवंशिक बदलाव, माइक्रोबियल संरचना और पोषण गुणों का अध्ययन किया जाएगा.

यह भी पढ़ें- अब यूपी के हर गांव का बच्चा ‘शुभांशु शुक्ला’ बनेगा, योगी सरकार अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की पौध कर रही तैयार

दूसरे प्रयोग में उन्होंने माइक्रोएल्गी (सूक्ष्म शैवाल) को प्रयोग के लिए तैनात और संग्रहित किया. माइक्रोएल्गी की क्षमता भोजन, ऑक्सीजन और यहां तक कि जैव ईंधन (बायोफ्यूल) उत्पादन के लिए जांची जा रही है. एक्सिओम स्पेस के अनुसार, इनकी सहनशीलता और बहुपरकार्य क्षमता उन्हें दीर्घकालिक अंतरिक्ष मिशनों में मानव जीवन समर्थन हेतु आदर्श बनाती है.

-भारत एक्सप्रेस



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