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‘तुम्हारे पास मिसाइल है…हमारे पास 10,000 फिदायीन है’, आतंकी मसूद अज़हर का नया ऑडियो आया सामने

मस्जिद में चलाए गए ऑडियो में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का मुखिया यह शेखी बघारता हुआ सुनाई दे रहा है कि दूसरों के पास “सब कुछ हो सकता है”, लेकिन उनके पास “फिदायीन” हैं.

Masood Azhar

मसूद अज़हर. (फाइल फोटो)

पाकिस्तान की एक मस्जिद से मसूद अजहर का एक धमाकेदार ऑडियो सामने आया है. यहां आतंकी अज़हर को एक ऑडियो में 10,000 फिदायिनों के बारे में बोलते हुए सुना जा रहा है.

मस्जिद में चलाए गए ऑडियो में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का मुखिया यह शेखी बघारता हुआ सुनाई दे रहा है कि दूसरों के पास “सब कुछ हो सकता है”, लेकिन उनके पास “फिदायीन” हैं.

मीडिया ने जैश बहावलपुर मस्जिद में चलाए गए ऑडियो को एक्सेस किया. आतंकी अजहर को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “मुजाहिद को दिए गए फंड का इस्तेमाल जिहाद के लिए किया जाएगा… पाकिस्तान को मुजाहिदों की उतनी ही जरूरत है जितनी बड़े धार्मिक नेताओं को. हमारे पास फिदायीन हैं, कोई भी ताकत या मिसाइल उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती.

हमारे पास 30,000 का कैडर है. जैश के पास जिहाद के लिए 10,000 फिदायीन तैयार हैं.”

अजहर को फिर से वापस क्यों ला रहा पाकिस्तान?

खुफिया सूत्रों ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर की असफलता के बाद अजहर को एक रणनीतिक असेट के रूप में  वापस से जिंदा किया गया है. वहीं, पाकिस्तान अमरनाथ यात्रा के दौरान अपने प्रॉक्सी वॉर को बढ़ा रहा है.

अजहर के ऑडियो को जारी करने का इस्तेमाल जानबूझकर उकसावे के तौर पर कर रहा है, जिसका उद्देश्य भारत के आंतरिक सौहार्द बिगाड़ना और पवित्र तीर्थयात्रा को निशाना बनाना है.

सूत्रों ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में सीमा पार आतंकी ठिकानों पर हमले के बाद पाकिस्तानी एजेंसियां स्लीपर सेल को फिर से संगठित करने और प्रतीकात्मक धमकियों के जरिए प्रभुत्व कायम करने के लिए अजहर जैसे निष्क्रिय आतंकी का इस्तेमाल कर रही हैं.”

मुजाहिदीन के लिए फंडिंग के बारे में अजहर का संदर्भ महज बयानबाजी नहीं है, यह संभावित रूप से विदेशी समर्थकों और हवाला मार्गों से जुड़े आगामी हमलों के वित्तपोषण के लिए एक छिपी कॉल है. उन्होंने कहा कि यह हाल ही में हुई इंटरसेप्ट्स से मेल खाता है, जो रावलपिंडी, लाहौर और खाड़ी क्षेत्रों में आतंकी वित्तपोषण चेन के फिर से शुरू होने का संकेत देते हैं.

सूत्रों ने कहा कि मिसाइलों की तुलना में फिदायीन का महिमामंडन करना लोन वुल्फ और आत्मघाती सेल की ओर नीतिगत बदलावृ है, जो पारंपरिक घुसपैठ रास्तों के अवरुद्ध होने के कारण आत्मघाती हमलावरों, हाइब्रिड आतंकवादियों और कट्टरपंथी युवाओं पर पाकिस्तान की निर्भरता को दर्शाता है.

इसके अलावा दक्षिण पंजाब और पीओके में नए सक्रिय मदरसा समूहों पर निर्भरता बढ़ गई है. मस्जिदों के ये प्रसारण साबित करते हैं कि पाकिस्तान में की शासन की आखों के सामने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों को बढ़ावा दिया जा रहा है.

कौन है मसूद अजहर?

मसूद अजहर संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी है जो जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक और नेता है. आतंकी अजहर पर पुलवामा आतंकी हमले में भी मुख्य रूप से शामिल होने का आरोप है.

अज़हर का जन्म 1968 में बहावलपुर में हुआ था और कक्षा 8 की परीक्षा पूरी करने के बाद कराची के एक मदरसे में भेज दिया गया था. यह मदरसा पाकिस्तानी जिहादी समूहों से संबंधित था. यहां से अजहर ने 1989 में स्नातक किया.

इसके बाद वह सोवियत-अफगान युद्ध में शामिल हुआ और हरकत-उल-मुजाहिदीन के लिए लड़ने के लिए भी भर्ती हुआ, लेकिन “खराब शारीरिक बनावट” के कारण अपनी ट्रेनिंग पूरी नहीं कर पाया.

जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद बढ़ने के साथ ही अज़हर को दो जिहादी समूहों, हरकत-उल-जिहाद इस्लामी और हरकत-उल-मुजाहिदीन को हरकत-उल-अंसार (एचयूए) में विलय करने का काम सौंपा गया. वह समूह का महासचिव बन गया और उसने यूनाइटेड किंगडम सहित कई देशों से अपने अनुयायियों की भर्ती की.


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-भारत एक्सप्रेस



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