Thailand-Cambodia war: प्रीह विहियर विवाद और एयरस्ट्राइक से बढ़ा border dispute, diplomatic tension ने दोनों देशों को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया।
Thailand-Cambodia War: पूरी दुनिया की नजर इजरायल-हमास, रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे जंग को देख ही रही थी, अचानक दुनिया के दो देशों के बीच ऐसा तनाव बढ़ा की बॉडर पर जंग जैसे हालात बन गए. गुरुवार को थाईलैंड-कंबोडिया (Thailand-Cambodia War) दोनों देशों की सेनाओं के बीच तड़ातड़ गोलियां चलीं. दोनों देश अब एक-दूसरे पर पहले गोलीबारी करने का आरोप लगा रहे हैं. इस झगड़े ने दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे तनाव को और गहरा कर दिया. ऐसे में चलिए जानते हैं क्या है इस जंग के पीछे की पूरी कहानी.
गोलीबारी से शुरू, अब बमबारी तक पहुंचा मामला (Thailand-Cambodia War)
गुरुवार सुबह सीमा पर दोनों सेनाओं के बीच झड़पें शुरू हुईं. कुछ ही घंटों में मामला इतना बिगड़ा कि थाईलैंड ने F-16 विमान भेजकर कंबोडिया के सैन्य इलाकों को निशाना बनाया. कंबोडिया ने दावा किया है कि थाईलैंड की सेना ने उनके इलाके में स्थित वाट काऊ किरी स्वरक पैगोडा की ओर जाने वाली सड़क पर बम गिराए हैं. वहीं थाईलैंड ने कहा कि उन्होंने कंबोडिया के दो क्षेत्रीय सैन्य मुख्यालयों को तबाह कर दिया है. कंबोडिया इससे भड़क गया है और उसने साफ कर दिया है कि वो इन हमलों का जवाब देगा. इस बयान ने साफ कर दिया है कि स्थिति अभी और बिगड़ सकती है.
क्या है जंग के पीछे की पूरी कहानी?
थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा करीब 817 किलोमीटर लंबी है, लेकिन इस लंबी दूरी में कई ऐसे क्षेत्र हैं जो विवादित माने जाते हैं. दोनों देशों के बीच सीमा रेखा को लेकर मतभेद नया नहीं है. इसका इतिहास 19वीं सदी से जुड़ा है, जब कंबोडिया फ्रांस के कब्जे में था और उन्हीं नक्शों के आधार पर बाद में सीमाएं तय की गईं.
सबसे बड़ा विवाद प्रीह विहियर मंदिर को लेकर है, जो डांगरेक पर्वत पर स्थित है. थाईलैंड का कहना है कि मंदिर और उसके आसपास का क्षेत्र उसका है, जबकि अंतरराष्ट्रीय अदालत ने 1962 में फैसला सुनाया था कि यह कंबोडिया की जमीन है. हालांकि, तब से अब तक यह इलाका बार-बार झड़पों का गवाह बन चुका है.
दोनों देशों ने वापस बुलाए राजदूत (Thailand-Cambodia War)
गुरुवार की दोनों दोशों के बीच लड़ाई से एक दिन पहले थाईलैंड ने कंबोडिया से अपने राजदूत को वापस बुला लिया था. इससे पहले सीमा पर बारूदी सुरंग विस्फोट में एक थाई सैनिक घायल हो गया था जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा और थाईलैंड ने अपना राजदूत वापस बुला लिया था. बुधवार को थाईलैंड ने यह भी कहा कि वो कंबोडिया के राजदूत को देश से निष्कासित करेगा.
एमराल्ड ट्रायंगल जहां से फिर भड़की चिंगारी
हालिया हिंसा की शुरुआत 28 मई को हुई जब एमराल्ड ट्रायंगल क्षेत्र में एक कंबोडियाई सैनिक की जान चली गई. यह जगह तीन देशों- थाईलैंड, कंबोडिया और लाओस की सीमा पर स्थित है और लंबे समय से विवादित मानी जाती है. इसके बाद से दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले तेज कर दिए हैं.
पहले भी झेल चुके हैं हिंसा
2008 में जब कंबोडिया ने प्रीह विहियर मंदिर को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल करवाया, तब भी दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं. 2011 में यह संघर्ष इतना बढ़ गया था कि 36,000 से ज्यादा लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे. हालांकि इसके बाद संघर्ष थोड़ा शांत हुआ, और दोनों देशों ने सीमा विवाद सुलझाने के लिए संयुक्त सीमा आयोग (JBC) भी बनाया. लेकिन अफसोस, आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका.
सिर्फ एक कॉल ने गिरा दी सरकार
थाईलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री पेतोंगतार्न शिनावात्रा को कंबोडिया के पूर्व नेता हुन सेन से फोन पर बात करने की वजह से पद छोड़ना पड़ा. इस कॉल ने थाईलैंड में गुस्सा भड़काया और उनकी सरकार गिर गई.
लोगों का हाल-बेहाल, जीवन हुआ मुश्किल
सीमा बंद होने से दोनों देशों के लोग परेशान हैं. कंबोडिया में काम करने वाले थाई मजदूर बेरोजगार हो गए. सीमा पार का व्यापार ठप है, बाजारों में सामान की किल्लत हो रही है. कंबोडिया ने थाई टीवी शो और फिल्मों पर भी पाबंदी लगा दी. उधर थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचायचाई ने कहा, “हम अपनी जमीन बचाएंगे, लेकिन नियमों का पालन करेंगे.” कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट भी शांति की बात करते हैं, लेकिन सीमा पर सैनिक तैनात हैं. अगर जल्द कोई हल नहीं निकला, तो यह छोटा-सा झगड़ा दुनिया बाद में एक जंग के तौर पर देखेगी जैसे इजरायल और हमास के बीच जंग चल रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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