Donald Trump Cuba Sanctions: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को पूरी तरह आर्थिक रूप से पंगु बनाने के लिए अब तक का सबसे घातक भू-राजनीतिक दांव चल दिया है. अमेरिका ने 11 शीर्ष सैन्य व सरकारी अधिकारियों और 3 सरकारी संगठनों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. लेकिन इस बार यह एक्शन सामान्य प्रतिबंधों जैसा नहीं है.
बता दें कि 1 मई 2026 को हस्ताक्षरित ‘एक्जीक्यूटिव ऑर्डर 14404’ के तहत अमेरिका ने ‘सेकेंडरी सेन्क्शन्स’ (Secondary Sanctions) का जो हथियार निकाला है, उसने क्यूबा के साथ व्यापार करने वाले दुनिया के बाकी देशों (जैसे मैक्सिको और वेनेजुएला) के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है.
रडार पर क्यूबा का सैन्य-आर्थिक साम्राज्य(Donald Trump Cuba Sanctions)
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ किया कि इस कार्रवाई का सीधा निशाना क्यूबा की जनता नहीं, बल्कि वहां की सेना द्वारा संचालित विशाल व्यापारिक साम्राज्य GAESA और उसके रसूखदार अधिकारी हैं. GAESA क्यूबा की अर्थव्यवस्था के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करता है.
अमेरिका का आरोप है कि क्यूबा की सरकार इस पैसे का इस्तेमाल अपने ही नागरिकों के दमन, विदेशी जासूसी और अमेरिकी सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए कर रही है. नए प्रतिबंधों के तहत इन अधिकारियों की अमेरिकी क्षेत्राधिकार में आने वाली सभी संपत्तियां फ्रीज कर दी गई हैं.
‘ट्रेडिंग विद द एनिमी’ से ‘IEEPA’ तक
इस पूरी कार्रवाई के पीछे असली भू-राजनीतिक पेंच अमेरिका का कानूनी बदलाव है. 1963 से क्यूबा पर लगे प्रतिबंध ‘ट्रेडिंग विद द एनिमी एक्ट’ (TWEA) के तहत चलते थे, जो मुख्य रूप से अमेरिकी कंपनियों को क्यूबा से व्यापार करने से रोकते थे. लेकिन नया आदेश ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) के तहत जारी हुआ है.
इसका मतलब यह है कि अब यदि कोई गैर-अमेरिकी कंपनी या विदेशी बैंक (जैसे यूरोपीय या एशियाई देश) भी क्यूबा की प्रतिबंधित संस्थाओं के साथ लेन-देन करेगा, तो अमेरिका उस पर भी प्रतिबंध लगा देगा और अमेरिकी बाजार से बाहर कर देगा. यह ठीक वैसा ही है जैसा अमेरिका ने ईरान और रूस के साथ किया था.
वेनेजुएला के बाद की टाइमलाइन
इस भू-राजनीतिक जंग (Donald Trump Cuba Sanctions) की टाइमलाइन को समझना जरूरी है. दरअसल साल 2026 की शुरुआत से ही क्यूबा एक अभूतपूर्व तेल संकट और आर्थिक मंदी से गुजर रहा है. अमेरिका ने पहले ही एक ईंधन नाकेबंदी (Fuel Blockade) लागू कर रखी है. हाल ही में वेनेजुएला में हुए अमेरिकी हस्तक्षेप और वहां निकोलस मादुरो की सत्ता जाने के बाद क्यूबा को मिलने वाली रियायती तेल की लाइफलाइन कट चुकी है.
मेक्सिको की सरकारी कंपनी पेमेक्स जैसी विदेशी कंपनियों को भी अमेरिका ने क्यूबा को तेल न देने की सख्त चेतावनी दी है. इस ईंधन संकट के कारण पूरा क्यूबा अंधेरे (Blackouts) में डूबा हुआ है और इसी नाजुक वक्त पर अमेरिका ने यह नया आर्थिक प्रहार किया है.
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क्या क्यूबा में होने वाला है सत्ता परिवर्तन?
भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन का अंतिम लक्ष्य क्यूबा में राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कानेल की कम्युनिस्ट सरकार का इस्तीफा और वहां ‘लोकतंत्र और खुले बाजार’ की स्थापना करना है. अमेरिका इस द्वीप को रूस और चीन जैसे देशों के ‘विदेशी खुफिया और सैन्य ऑपरेशन्स’ का बेस बनने से रोकना चाहता है जो अमेरिकी मुख्य भूमि से महज 90 मील दूर है.
ज्ञात रहे जहां एक तरफ टीएमसी और विपक्षी दल भारत में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को ‘बदले की राजनीति’ कहते हैं, वैश्विक मंच पर अमेरिका के इस कदम को भी क्यूबा ‘तानाशाही और संप्रभुता पर हमला’ बता रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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