निमिषा प्रिया.
Kerala Nurse Nimisha Priya: अरब प्रायद्वीप के इस्लामिक मुल्क यमन (Yemen) में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा को लेकर स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है. उसे एक मर्डर केस के आरोप में जेल में रखा गया है, साथ ही उसे मौत की सजा भी सुनाई जा चुकी है. निमिषा को बचाने की कई स्तर पर कोशिश की जा रही है.
यमन (Yemen) में भारतीय ग्रैंड मुफ्ती कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार का कहना है कि निमिषा की मौत की सजा अब रद्द हो गई है. हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इन दावों को भ्रामक करार देते हुए खारिज किया है. मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि ये जानकारियां मौजूदा स्थिति को सही ढंग से नहीं दर्शातीं. निमिषा पर यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या का आरोप है, जिसके लिए उसे जून 2018 में दोषी ठहराया गया था.
जो शख्स मारा गया, वो निमिषा को प्रताड़ित करता था
केरल की रहने वाली निमिषा प्रिया 2017 से यमन की जेल में बंद हैं. उन पर यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी को ड्रग का ओवरडोज देकर हत्या करने का आरोप है. निमिषा और महदी एक प्राइवेट क्लिनिक में साझेदार थे. आरोप है कि महदी ने निमिषा का पासपोर्ट अपने कब्जे में रखा था और उसे प्रताड़ित करता था. इस मामले में निमिषा को 16 जुलाई 2025 को गोली मारकर मौत की सजा दी जानी थी, लेकिन 15 जुलाई को इसे अस्थायी रूप से टाल दिया गया.
निमिषा के लिए भारत-यमन के धर्मगुरुओं की बातचीत
15 जुलाई को भारतीय ग्रैंड मुफ्ती कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार और यमन (Yemen) के सूफी विद्वान शेख हबीब उमर बिन हाफिज ने इस मामले पर चर्चा की थी. इस बातचीत में यमन के सुप्रीम कोर्ट के एक जज और मृतक के भाई अब्देल फत्तह महदी भी शामिल थे. यह पहला मौका था जब मृतक के परिवार का कोई सदस्य बातचीत के लिए तैयार हुआ. बातचीत शरिया कानून के तहत हुई, जो मृतक के परिवार को दोषी को माफ करने या ब्लड मनी स्वीकार करने का अधिकार देता है.
ब्लड मनी के रूप में 10 लाख अमेरिकी डॉलर ठुकराए
मृतक तलाल अब्दो महदी के परिवार ने निमिषा को माफ करने से साफ इनकार कर दिया है. मृतक के भाई अब्देल फत्तह महदी ने सोशल मीडिया और बीबीसी अरबी को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे शरिया के तहत ‘किसास’ (बदला) की मांग करते हैं. उन्होंने ब्लड मनी के रूप में 10 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 8.5 करोड़ रुपये) की पेशकश को भी ठुकरा दिया. उनका कहना है कि यह मामला उनकी इज्जत से जुड़ा है और वे किसी भी तरह का मुआवजा या समझौता नहीं चाहते.
अड़चन: यमन में भारत का नहीं कोई स्थायी दूतावास
यमन (Yemen) में भारत का कोई स्थायी दूतावास नहीं है, क्योंकि 2015 में राजनीतिक अस्थिरता के कारण सना में भारतीय दूतावास बंद कर दिया गया था. भारत सरकार रियाद में मौजूद अपने राजदूत के जरिए यमन सरकार से बातचीत कर रही है. 14 जुलाई को भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वह निमिषा के मामले में सीमित दायरे में ही हस्तक्षेप कर सकती है. अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने अपनी ओर से हर संभव प्रयास किया है.
यमन का शरिया कानून और परिवार की मांगें बड़ी बाधा
निमिषा प्रिया का मामला अब भी जटिल बना हुआ है. मृतक परिवार के अडिग रवैये और विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण ने स्थिति को और उलझा दिया है. भारत सरकार और सामाजिक संगठन निमिषा की जान बचाने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन यमन के शरिया कानून और मृतक परिवार की मांगें इस राह में सबसे बड़ी बाधा हैं.
‘सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ का रूख
‘सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ इस मामले में सक्रिय रूप से काम कर रहा है. संगठन के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि निमिषा को बचाने का एकमात्र रास्ता मृतक परिवार का ब्लड मनी स्वीकार करना हो सकता है. हालांकि, परिवार के सख्त रुख के कारण यह रास्ता भी बंद होता दिख रहा है.
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