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अकेले पड़ गए ट्रंप, ईरान की संसद ने पास किया बिल, खुद की पार्टी ने भी नहीं दिया साथ

US Israel Iran conflict: अमेरिकी संसद के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान युद्ध से जुड़ी शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव पास कर दिया है.

US Israel Iran conflict: अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान युद्ध से जुड़ी शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव पारित कर दिया है. इस कदम को ट्रंप प्रशासन और उसकी ईरान नीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. खास बात यह रही कि इस प्रस्ताव को कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी समर्थन दिया. वोटिंग में 215 सांसदों ने पक्ष में और 208 ने विरोध में मतदान किया.

कानून तोड़ने का आरोप

पेंसिल्वेनिया के सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने कहा कि अमेरिका में वार पावर्स एक्ट नाम का कानून है, जिसके तहत राष्ट्रपति को युद्ध जैसे बड़े फैसलों के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेनी होती है. उनका कहना था कि ऐसे मुद्दों पर संसद में खुली बहस और वोटिंग जरूरी है. यह प्रस्ताव न्यूयॉर्क के डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स ने पेश किया था. उन्होंने कहा कि सभी डेमोक्रेट सांसदों ने इसका समर्थन किया और कुछ रिपब्लिकन नेताओं का साथ मिलना बेहद अहम है.

विरोध में हाउस स्पीकर

हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया. उनका कहना है कि इससे ट्रंप प्रशासन की शांति वार्ता और कूटनीतिक प्रयास कमजोर हो सकते हैं. उन्होंने दावा किया कि ईरान में अमेरिका के सैन्य लक्ष्य पूरे हो चुके हैं और अब ट्रंप शांति समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं. इस बीच पेंटागन, विदेश मंत्रालय और USAID के इंस्पेक्टर जनरल ने ईरान युद्ध की जांच शुरू कर दी है.

60 दिन से ज्यादा युद्ध पर रोक

वार पावर्स एक्ट के अनुसार राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के 60 दिन से अधिक समय तक विदेशी सैन्य अभियान नहीं चला सकते. जांच एजेंसियों का कहना है कि ईरान में अमेरिकी अभियान 28 फरवरी से चल रहा है और अब यह 60 दिन की सीमा पार कर चुका है. ट्रंप प्रशासन ने ऑपरेशन “एपिक फ्यूरी” के लिए कांग्रेस से अनुमति नहीं ली थी.

आगे की राह

अब ट्रंप प्रशासन को कांग्रेस, जांच एजेंसियों और अपनी ही पार्टी के नेताओं के सवालों का सामना करना पड़ रहा है. प्रस्ताव सीनेट में भेजा जाएगा, लेकिन राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए नहीं जाएगा. यह सीधे कानून नहीं बनेगा, फिर भी ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक और कानूनी दबाव बढ़ा सकता है.

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यह घटनाक्रम अमेरिकी राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है और आने वाले दिनों में सीनेट की भूमिका और वार पावर्स एक्ट पर बहस और तेज हो सकती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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