US Fuel Crisis 2026: अमेरिका इस समय दोहरे मोर्चे पर भीषण संकट में घिरता नजर आ रहा है. एक तरफ देश की दिग्गज तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि वैश्विक ईंधन संकट आ चुका है, वहीं दूसरी तरफ पेंटागन की एक विस्फोटक आंतरिक रिपोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों की हवा निकाल दी है जिसमें वे अमेरिकी हथियारों के भंडार को ‘असीमित’ बताते रहे हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल की ताजा रिपोर्ट और पेंटागन महानिरीक्षक (IG) के खुलासे ने व्हाइट हाउस की चिंताओं को कई गुना बढ़ा दिया है.
तेल कंपनियों की दो-टूक (Chevron Warning US Fuel Crisis)
वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, अमेरिकी तेल उद्योग के प्रमुख अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि घटती इन्वेंट्री, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) के निचले स्तर पर पहुंचने और मध्य पूर्व के ऊर्जा ढांचे पर लगातार हो रहे हमलों के कारण वैश्विक ईंधन संकट अब दरवाजे पर दस्तक नहीं दे रहा, बल्कि आ चुका है. शेवरॉन के सीईओ माइक विर्थ ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा-
“बाजार की सुरक्षा करने वाले तमाम बफर अब पूरी तरह खत्म हो चुके हैं. काश मैं यह कह पाता कि मुझे हालात सुधरने की कोई वजह दिख रही है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा होना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है.”
पिछले कुछ समय में यूएस क्रूड ऑयल के रेट 19% उछलकर करीब 101 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं. वहीं डीजल 6.23 डॉलर प्रति गैलन जबकि, गैसोलीन के दाम 4.32 डॉलर प्रति गैलन पर पहुंच गए हैं. हालांकि, ट्रंप प्रशासन लगातार यह दावा कर रहा है कि तेल आपूर्ति में यह बाधा महज ‘अस्थायी’ है, लेकिन जमीनी आंकड़े इस दावे की पोल खोल रहे हैं.
पेंटागन की रिपोर्ट से बड़ा झटका (US Fuel Crisis And Operation Epic Fury Cost)
ईंधन संकट के बीच रक्षा मोर्चे से आई खबर ने ट्रंप प्रशासन की रणनीतिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पेंटागन के महानिरीक्षक (IG) की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष ने अमेरिका के गोला-बारूद के भंडार में भारी कमी ला दी है और हथियारों की दोबारा आपूर्ति से जुड़ी ‘औद्योगिक बाधाओं’ की पोल खोलकर रख दी है.
भारी नुकसान और अरबों डॉलर का खर्च
पेंटागन रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से 30 जून के बीच चलाए गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ ने अमेरिकी रक्षा बजट और सैन्य साजो-सामान को तगड़ा नुकसान पहुंचाया है. यह रिपोर्ट सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप के उस सार्वजनिक दावे का खंडन करती है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका के पास हथियारों और गोला-बारूद का ‘लगभग असीमित’ भंडार मौजूद है.
- कुल अनुमानित खर्च लगभग 33.4 अरब डॉलर हुआ.
- कुल खर्च में से अकेले $22.3 अरब डॉलर के केवल हथियार और गोला-बारूद इस्तेमाल हो गए.
रिपोर्ट में माना गया है कि इस अत्यधिक खर्च के चलते अमेरिकी सेना को ‘रणनीतिक इन्वेंट्री की कमी’ का सामना करना पड़ रहा है. इससे सैन्य साजो-सामान का बड़ा नुकसान हुआ है.
- 4 F-15 लड़ाकू विमान पूरी तरह नष्ट
- 1 अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमान क्षतिग्रस्त
- 7 KC-135 ईंधन टैंकर विमान क्षतिग्रस्त
- 30 तक MQ-9 रीपर ड्रोन्स नष्ट
एक तरफ आसमान छूती तेल की कीमतें (US Fuel Crisis) आम अमेरिकी नागरिकों की जेब पर भारी पड़ रही हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध के मोर्चे पर हथियारों की कमी और नष्ट होते लड़ाकू विमानों ने ट्रंप प्रशासन के दावों को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. खैर अब देखना होगा कि डोनाल्ड ट्रंप इस रिपोर्ट को किस तरह से लेते हैं.
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