अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने शुक्रवार (19 सितंबर) को विदेशी कामगारों के लिए एच-1बी वीज़ा (H-1B Visa) की वार्षिक फीस बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर (लगभग 88 लाख रु) कर दी. इस कदम का टेक कंपनियों और अन्य कंपनियों द्वारा नियुक्त भारतीय वर्कर्स पर गहरा असर पड़ेगा.
ट्रंप के इस फैसले के बाद से हर तरफ, खासकर आइट सेक्टर में हड़कंप सा मचा हुआ है. इस फैसले का असर सबसे ज्यादा भारतीय तकनीकि पेशेवरों पर पड़ेगा, क्योंकि टोटल H-1B वीज़ा लेने वाले में 70 प्रतिशत भारतीय हैं. USCIS के डेटा के मुताबिक, वित्त वर्ष 24 में कुल स्वीकृत लगभग 4 लाख आवेदनों में से अनुमानित करीब तीन लाख के आस-पास भारतीय कर्मचारी H-1B वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं.
नई फीस के ऐलान के बाद से टेक कंपनियों में मची अफरा-तफरी के और उठ रहे सवालों के बीच व्हाइट हाउस की ओर से बड़ा बयान जारी किया है. प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने नई फीस को लेकर साफ किया कि ये 1,00,000 डॉलर की फीस कोई एनुअल चार्ज नहीं है, बल्कि नए आवेदकों के लिए वन टाइम फीस है.
क्या है H-1B वीज़ा ?
H-1B एक अमेरिका का नॉन रेजिडेंशियल वीजा है, जो वहां मौजूद कंपनियों को टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, फाइनेंस और एजुकेशन जैसे खास सेक्टर्स में विदेशी कर्मचारियों को हायर करके नौकरी देने की परमिशन देता है. बड़ी-बड़ी टेक दिग्गज कंपनियां जैसे Infosys, TCS, Google, अमेजन से लेकर माइक्रोसॉफ्ट और मेटा में डेवलपर, इंजीनियर समेत अन्य कर्मचारी एच-1बी वीजा लेकर काम करते हैं और इनमें भारतीयों की संख्या अधिक है.
नए नियम के मुताबिक अब कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों की एंट्री या दोबारा एंट्री के लिए हर H-1B वीज़ा के लिए 1 लाख डॉलर यानि करीबन 88.10 देने होंगे, जो पहले महज 6 लाख था. अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने पहले कहा था कि यह चार्ज हर साल अदा करना होगा.
इसके अलावा नए वीज़ा एप्लिकेशन के अलावा रिन्युल वीज़ा के लिए भी लागू होगा. रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां जब तक पेमेंट अदा नहीं कर देती तब तक कर्मचारियों को वापस अमेरिका आने की परमिशन नहीं जा सकती है.
1 लाख डॉलर एक बार ही जमा करना होगा
व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने नए नियम को लेकर एक्स पर एक-एक सवालों का जवाब दिया. उन्होंने पोस्ट कर बताया कि 1 लाख डॉलर की फीस वार्षिक नहीं बल्कि एक बार ही देना होगा.
कैरोलाइन लेविट ने कहा,
स्पष्ट कर दें:
- यह कोई वार्षिक शुल्क नहीं है. यह एकमुश्त शुल्क है जो केवल याचिका पर लागू होता है.
- जिन लोगों के पास पहले से ही H-1B वीज़ा है और जो इस समय देश से बाहर हैं, उनसे पुनः प्रवेश के लिए $100,000 का शुल्क नहीं लिया जाएगा.
- H-1B वीज़ा धारक देश से बाहर जा सकते हैं और पुनः प्रवेश कर सकते हैं, जैसा कि वे सामान्य रूप से करते हैं; ऐसा करने की उनकी जो भी क्षमता है, उस पर कल की घोषणा का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
- 3 यह केवल नए वीज़ा पर लागू होता है, रिन्यूअल पर नहीं, और वर्तमान वीज़ा धारकों पर नहीं.
To be clear:
1.) This is NOT an annual fee. It’s a one-time fee that applies only to the petition.
2.) Those who already hold H-1B visas and are currently outside of the country right now will NOT be charged $100,000 to re-enter.
H-1B visa holders can leave and re-enter the…
— Karoline Leavitt (@PressSec) September 20, 2025
इस बीच भारतीय नागरिकों की मदद के लिए अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर +1-202-550-9931 जारी किया, जिससे पूरी जानकारी ली जा सकती है. बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से H-1B वीजा नीति में एक ये प्रावधान भी शामिल है कि अगली एच-1बी लॉटरी के 30 दिन के भीतर इसकी समीक्षा की जाएगी.
-भारत एक्सप्रेस
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