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गुज़रे ज़माने की मशहूर अदाकारा आशा पारेख को मिलेगा दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

आशा पारेख को दादा साहब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा

मुंबई– दिग्गज हिंदी फिल्म अभिनेत्री-निर्देशक-निमार्ता आशा पारेख को जल्द ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा इस साल दादासाहेब फाल्के पुरस्कारों में सिनेमा में उनके योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान से सम्मानित किया जाएगा. केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने अभिनेत्री के सम्मान की घोषणा करने के लिए अपने ट्विटर का सहारा लिया. उन्होंने ट्वीट किया, “यह घोषणा करते हुए सम्मानित महसूस कर रहा हूं कि दादासाहेब फाल्के चयन जूरी ने आशा पारेख जी को भारतीय सिनेमा में उनके अनुकरणीय जीवन भर के योगदान के लिए मान्यता और पुरस्कार देने का फैसला किया है. दादा साहब फाल्के पुरस्कार भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा विज्ञान भवन में 68 वें एनएफए में प्रदान किया जाएगा.”

आशा पारेख के सफर की शुरूआत

लगभग 5 दशकों के करियर में, आशा पारेख ने 10 साल की उम्र में एक बाल कलाकार के रूप में अपने सफर की शुरूआत फिल्म ‘मां’ में बेबी आशा पारेख नाम से की थी. सामाजिक पारिवारिक नाटक का निर्देशन बिमल रॉय ने बॉम्बे टॉकीज के लिए किया था. बुरे समय से गुजर रहे स्टूडियो के लिए फिल्म का निर्देशन करने के लिए उन्हें कोलकाता से बॉम्बे आने के लिए कहा गया था.

बिमल रॉय ने एक स्टेज फंक्शन में आशा को डांस करते देखा और उन्हें फिल्म में कास्ट किया और फिर उन्हें ‘बाप बेटी’ में रिपीट किया. बाद की फिल्म की विफलता ने उन्हें निराश किया, और भले ही उन्होंने कुछ और बाल भूमिकाएं कीं, फिर भी उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा फिर से शुरू करने के लिए छोड़ दिया. सोलह साल की उम्र में उन्होंने फिर से अभिनय में हाथ आजमाया था. उन्होंने एक नायिका के रूप में अपनी शुरूआत करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें विजय भट्ट की ‘गूंज उठी शहनाई’ से अस्वीकार कर दिया गया क्योंकि फिल्म निर्माता ने दावा किया कि वह स्टार सामग्री नहीं थी.

डेटिंग की भी अफवाह

बाद में, फिल्म निर्माता सुबोध मुखर्जी और लेखक-निर्देशक नासिर हुसैन (बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान के चाचा) ने उन्हें शम्मी कपूर के साथ ‘दिल देके देखो’ में नायिका के रूप में लिया, जिसने उन्हें एक बहुत बड़ा स्टार बना दिया. इस फिल्म ने आशा और नासिर के बीच लंबे समय तक संबंध बनाए रखा. दोनों के डेटिंग की भी अफवाह थी, जिसकी पुष्टि खुद अभिनेत्री ने अपने संस्मरण ‘द हिट गर्ल’ में की थी.
1992 में, उन्हें सिनेमा में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था. तीन साल बाद, आशा ने ‘आंदोलन’ में अभिनय किया और बाद में 1999 की फिल्म ‘सर आंखों पर’ में अपनी कैमियो उपस्थिति के बाद उन्होंने फिल्मों से संन्यास ले लिया.

-आईएएनएस/भारत एक्सप्रेस



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