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8वीं कक्षा तक स्वास्थ्य एवं योग विज्ञान को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर

दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें 8वीं कक्षा तक स्वास्थ्य एवं योग विज्ञान को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाने की मांग की गई है.

Health Education
Prashant Rai Edited by Prashant Rai

दिल्ली हाई कोर्ट में बच्चों के समग्र विकास के साथ-साथ शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अनुरूप उनकी शारीरिक और मानसिक क्षमताओं के विकास के लिए 8वीं कक्षा तक स्वास्थ्य एवं योग विज्ञान को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा कि यह मुद्दा नीति निर्माण के दायरे में है और इसे विशेषज्ञों द्वारा निपटाया जाना चाहिए. फिलहाल अदालत ने मामले में दिल्ली सरकार व एनसीईआरटी को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है. कोर्ट 9 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगा. अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में यह घोषित करने की मांग की गई है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत गारंटीकृत शिक्षा का अधिकार समग्र एकीकृत समान गुणवत्ता वाली शिक्षा के अधिकार हो.

कोर्ट का रुख

पीठ ने याची से कहा आप एक शिक्षाविद की तरह कुछ दिशा-निर्देश मांग रहे हैं. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा क्या है? क्या इसे कहीं परिभाषित किया गया है? नहीं. इस मामले पर क्षेत्र के विशेषज्ञों, शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों को विचार करना चाहिए. समग्र क्या है? आपके अनुसार इसका अर्थ अलग हो सकता है. किसी और के अनुसार इसका अर्थ अलग हो सकता है. क्या ये मुद्दे न्यायोचित हैं?

दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि छात्रों का पाठ्यक्रम राज्य द्वारा तैयार नहीं किया जाता है और एनसीईआरटी द्वारा जो भी सुझाव दिया जाता है, उसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाता है.

योग पर विशेष ध्यान क्यों?

पीठ ने याची से पूछा बच्चों के स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए केवल योग पर ही जोर क्यों दिया जा रहा है, जबकि ऐसा करने के अन्य तरीके भी हैं. स्वास्थ्य का अधिकार और शिक्षा का अधिकार एक दूसरे के पूरक और अनुपूरक हैं.

पीठ ने कहा आप पाठ्यक्रम में योग को शामिल करने के लिए निर्देश देने के लिए परमादेश की मांग कर रहे हैं. परमादेश के लिए, आपके पास वैधानिक अधिकार होना चाहिए. वह कहां है? न्यायालय ने आगे कहा कि भले ही यह माना जाए कि योग बच्चों में मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है, लेकिन मुद्दा यह है कि क्या ऐसा निर्देश जारी किया जा सकता है.


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-भारत एक्सप्रेस



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