आरबीआई के नए गर्वनर संजय मल्होत्रा.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को भारत की आर्थिक वृद्धि पर भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि देश 7% या उससे अधिक की विकास दर प्राप्त कर सकता है और हमें इसे हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए. यह बयान उन्होंने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद दिया, जहां रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर इसे 6.25% किया गया. यह पिछले दो वर्षों में पहली बार और पांच वर्षों में पहली बार हुआ है जब दरों में कटौती की गई है.
आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति पर आरबीआई का रुख
मल्होत्रा ने कहा, “भारत 7% या उससे अधिक की विकास दर प्राप्त कर सकता है और हमें इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.” आरबीआई ने वित्त वर्ष **2024-25 (FY25) के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.6% और 2025-26 (FY26) के लिए 6.7% रहने का अनुमान लगाया है.
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में आरबीआई का ध्यान आर्थिक वृद्धि पर है क्योंकि मुद्रास्फीति (महंगाई) घट रही है और आगे भी घटने की संभावना है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मूल्य स्थिरता (प्राइस स्टेबिलिटी) आरबीआई की प्राथमिक जिम्मेदारी बनी रहेगी.
दिसंबर 2024 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 5.2% रही, जबकि थोक मूल्य सूचकांक (WPI) महंगाई दर नवंबर के 1.89% से बढ़कर दिसंबर में 2.37% हो गई.
बैंकों की सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण पर फोकस
जब बैंकों की सुरक्षा और ग्राहकों के हितों की रक्षा के बारे में पूछा गया, तो गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई ग्राहकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी बैंक द्वारा की गई ग़लत बिक्री (Mis-selling) को गंभीरता से लिया जाएगा. उन्होंने आश्वासन दिया कि बैंक धोखाधड़ी के मामलों में केंद्रीय बैंक पूरी सहायता देगा.
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने कहा कि अधिकतर समस्याओं को बातचीत के ज़रिए हल कर लिया जाता है और केवल गंभीर मामलों को ही सार्वजनिक किया जाता है.
विनियमन और नीतिगत लचीलापन
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई नए नियम लागू करने से पहले बैंकों की कंप्लायंस लागत पर विचार करता है. उन्होंने यह भी बताया कि लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) नियमों को लागू करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा ताकि बाजार में अस्थिरता न आए.
उन्होंने क्रेडिट लॉस फ्रेमवर्क पर कहा कि यह अभी सिर्फ चर्चा में है और कोई आधिकारिक मसौदा जारी नहीं किया गया है. इसी तरह, नए प्रोजेक्ट फाइनेंस नियम मार्च 2026 तक जारी किए जाएंगे.
इसके अलावा, आरबीआई ने भारतीय बैंकों और एनबीएफसी के लिए नई वेब डोमेन शुरू करने की घोषणा की, ताकि ग्राहक असली और नकली वेबसाइटों में फर्क कर सकें.
वैश्विक अनिश्चितता और नीतिगत रणनीति
मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता भारत की वृद्धि को प्रभावित कर सकती है, लेकिन मजबूत विनिर्माण गतिविधि (मैन्युफैक्चरिंग), स्थिर उपभोग प्रवृत्ति और बेहतर कृषि उत्पादन से आर्थिक परिदृश्य उत्साहजनक बना हुआ है.
उन्होंने कहा कि फिलहाल विकास प्राथमिकता है, लेकिन आरबीआई का नीति रुख ‘न्यूट्रल’ रहेगा, जिससे बदलते आर्थिक हालात में तेजी से नीतिगत निर्णय लिए जा सकें.
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-भारत एक्सप्रेस
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