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दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्दोष व्यापारियों के बैंक खातों को फ्रीज करने पर जताई चिंता

दिल्ली हाईकोर्ट ने साइबर अपराधों की जांच के दौरान निर्दोष व्यापारियों के बैंक खातों को फ्रीज करने पर चिंता जताई. कोर्ट ने गृह मंत्रालय को एक एसओपी तैयार करने के लिए सभी हितधारकों से परामर्श करने को कहा.

Delhi Highcourt
Aarika Singh Edited by Aarika Singh

दिल्ली हाईकोर्ट ने साइबर अपराधों की जांच करते समय जांच एजेंसियों की ओर से निर्दोष व्यापारियों के बैंक खातों को फ्रीज करने पर चिंता व्यक्त की है. उसने कहा कि इस तरह के साइबर अपराधों में यदि कोई जालसाज शिकायतकर्ता को धोखा देता है और ठगे गए पैसे की मदद से जब ऐसा जालसाज ऐसे पैसे से कुछ खरीदता है, तो पुलिस ऐसे मनी-ट्रेल का पीछा करते हुए सभी संबंधित लोगों के बैंक खातों को फ्रीज करने का निर्देश देती है. इस प्रक्रिया में कई निर्दोष प्राप्तकर्ताओं को बिना किसी गलती के इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है.

इसे देखते हुए न्यायमूर्ति मनोज जैन ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से सभी हितधारकों से परामर्श करने और एक एसओपी तैयार करने पर विचार करने को कहा है. जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसे मामलों को अपेक्षित विचार और सहानुभूति के साथ संभाला जाए. उन्होंने यह निर्देश एक लॉजिस्टिक कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसके बैंक खाते में 93 करोड़ रुपए से अधिक की राशि थी, जिसे 200 रु पए की एक प्रविष्टि के कारण फ्रीज कर दिया गया था. उन्होंने इसके साथ ही इस मामले का निपटारा कर दिया.

वित्तीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो सकता है

वैसे मामले के लंबित रहने के दौरान विवादित दो सौ रुपए की राशि को छोड़कर अतिरिक्त को डी-फ्रीज कर दिया गया था. इसने कोर्ट को परेशान करने वाले ऐसे ही कई मामलों को उजागर करने के लिए प्रेरित किया. हाल ही में एक छोले-भटूरे बेचने वाले के खाते को 105 रुपये के कथित साइबर धोखाधड़ी के लिए डी-फ्रीज करने का आदेश दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि किसी भी ऐसी जांच एजेंसी की बैंक को इस तरह का निर्देश जारी करने की क्षमता के बारे में कोई संदेह नहीं है. लेकिन इस अदालत को लगता है वह ऐसा करते समय कोई ठोस कारण नहीं देता है, जबकि उसे औचित्य बताना चाहिए.

अगर बिना कोई कारण बताए इस तरह के कदम उठाए जाते हैं तो निश्चित रूप से ऐसे खाताधारकों की वित्तीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो सकता है. छोटे-मोटे व्यापारियों को उनके अस्तित्व को भी बाधित कर सकता है. इस तरह की कोई भी कार्रवाई उनके जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर सकता है. कोर्ट ने जांच एजेंसियों को सुझाव दिया कि वह ऐसे मामलों में विवादित राशियों को सुरक्षित रखने का आदेश दे सकता है.

-भारत एक्सप्रेस



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