दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह टैक्सी एप्लिकेशन लॉन्च करने से पहले उन्हें दिव्यांगों के अनुकूल बनाने के लिए लागू नियामक तंत्र पर जवाब दाखिल करे. न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का आदेश दिया है कि क्या ऐप लॉन्च करने से पहले दिव्यांगों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया है या नहीं.
कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
कोर्ट ने यह निर्देश दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ता अमर जैन और दृष्टिबाधित बैंकर दीप्तो घोष चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया. याचिका में रैपिडो के स्वामित्व वाली कंपनी रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज को दिव्यांगों को दी जा रही सुविधाओं की जांच करने और उनकी परेशानियों को हल करने की मांग की गई है.
रैपिडो का ऐप दिव्यांगों के लिए उपयोगी नहीं
हाईकोर्ट ने रैपिडो की एक्सेसिबिलिटी ऑडिट रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कहा कि रिपोर्ट के प्रमाण पत्र से चिंताजनक स्थिति सामने आई है. कोर्ट ने पाया कि रैपिडो का ऐप दिव्यांगों के अनुकूल होने से बहुत दूर है.
याचिकाकर्ताओं के वकील राहुल बजाज ने अदालत में दलील दी कि रैपिडो के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि दिव्यांगों से संबंधित कानूनों का पालन न करने पर कंपनी पर जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए.
रैपिडो का जवाब
रैपिडो के वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि एक्सेसिबिलिटी ऑडिट रिपोर्ट में उल्लिखित सभी कमियों को दूर किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कंपनी चार महीने के भीतर ऐप को पूरी तरह से दिव्यांगों के अनुकूल बना देगी.
न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने स्पष्ट किया कि अगर चार महीने के भीतर सुधार नहीं किया गया तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा. मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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