राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम मोदी.
देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने त्याग और करुणा के प्रतीक ईसा मसीह के पुनरुत्थान दिवस Easter की सबको शुभकामनाएं दी हैं. पीएम मोदी ने कहा यह ईस्टर इसलिए खास है क्योंकि दुनिया ईसा मसीह के जुबली वर्ष को बड़े उत्साह के साथ मना रही है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर अपने पोस्ट में शुभकामनाएं देते हुए लिखा, “सभी को ईस्टर (Easter) की बधाई! इस अवसर पर हम ईसा मसीह के पुनरुत्थान का जश्न मनाते हैं. यह त्योहार नई उम्मीद और नई शुरुआत की भावना को प्रेरित करता है. ईसा मसीह की शिक्षाएं मानवता को प्रेम और त्याग के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं. आशा और आनंद का यह त्योहार सभी के लिए शांति और समृद्धि लाए.”
Easter greetings to all! On this occasion, we celebrate the resurrection of Jesus Christ. This festival inspires the spirit of new hope and new beginnings. The teachings of Jesus Christ inspire humanity to follow the path of love and sacrifice. May this festival of joy and hope…
— President of India (@rashtrapatibhvn) April 20, 2025
Easter की पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सभी को ईस्टर की हार्दिक शुभकामनाएं. यह ईस्टर इसलिए खास है क्योंकि दुनिया ईसा मसीह के जुबली वर्ष को बड़े उत्साह के साथ मना रही है. कामना है कि ये पवित्र अवसर हर व्यक्ति में आशा, नवीनीकरण और करुणा की भावना जगाए रखे. चारों ओर खुशियां और सद्भावना हो.”
Wishing everyone a blessed and joyous Easter. This Easter is special because world over, the Jubilee Year is being observed with immense fervour. May this sacred occasion inspire hope, renewal and compassion in every person. May there be joy and harmony all around.
— Narendra Modi (@narendramodi) April 20, 2025
क्यों मनाया जाता है ईस्टर?
बता दें कि ईस्टर (Easter) ईसाई धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो यीशु मसीह के पुनरुत्थान का उत्सव मनाता है. यह माना जाता है कि यीशु को सूली पर चढ़ाए जाने के तीसरे दिन वे जीवित हो वापस लौटे थे. ये ईसाई विश्वास का केंद्रीय आधार है. ईस्टर वसंत ऋतु में, चंद्र कैलेंडर के आधार पर, गुड फ्राइडे के बाद आने वाले रविवार को मनाया जाता है, इसकी तिथि हर साल बदलती है. यह पर्व आध्यात्मिक नवीकरण, आशा और नई शुरुआत का प्रतीक है.
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ईस्टर (Easter) से पहले का समय, जिसे लेंट कहते हैं, 40 दिनों का उपवास और प्रायश्चित का काल होता है. ईस्टर के दिन चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं, भजन और उत्सव आयोजित होते हैं. परंपराओं में ईस्टर अंडे सजाना और छिपाना शामिल है, जो नई जिंदगी का प्रतीक हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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