दिल्ली के हौज खास स्थित डियर पार्क से हिरणों को राजस्थान के जंगलों में स्थानांतरित करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है. कोर्ट ने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे राजस्थान में उन स्थानों का दौरा करें, जहां अब तक 271 हिरणों को स्थानांतरित किया जा चुका है, ताकि उनकी वर्तमान स्थिति का आकलन किया जा सके.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बताया कि डियर पार्क में लगभग 600 हिरण थे, जिनमें से अब तक 261 हिरणों को स्थानांतरित किया गया है. कोर्ट ने केंद्रीय प्राधिकरण से दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. इस मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होगी, जिसकी सुनवाई जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ करेगी.
यह याचिका गैर-सरकारी संगठन ‘न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी’ ने दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि हिरणों को बिना उचित आवास मूल्यांकन, पशु चिकित्सा जांच और गर्भवती हिरणों व नवजात शावकों जैसे संवेदनशील समूहों की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना ही स्थानांतरित किया जा रहा है, जो न केवल वन्यजीव संरक्षण कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि हिरणों की जान को भी खतरे में डाल सकता है.
एनजीओ ने पहले दिल्ली हाई कोर्ट में भी याचिका दाखिल की थी, जिसे सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया गया था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से आग्रह किया कि मॉनसून के दौरान हिरणों के स्थानांतरण पर रोक लगाई जाए, क्योंकि यह मौसम हिरणों के स्वास्थ्य और उनके नवजात बच्चों के लिए संवेदनशील होता है.
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि डीडीए और संबंधित प्राधिकरणों ने न तो किसी वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर आवास मूल्यांकन किया और न ही गर्भवती और नवजात हिरणों के लिए कोई विशेष प्रबंध किए. यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की गाइडलाइंस का उल्लंघन है.
गौरतलब है कि डीडीए ने हौज खास डियर पार्क में हिरणों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इन्हें राजस्थान के विभिन्न अभयारण्यों में भेजने का फैसला लिया था. लेकिन एनजीओ का कहना है कि यह कदम न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि पर्यावरणीय और जैविक संतुलन के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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