सांकेतिक फोटो (सोशल मीडिया)
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और अन्य प्राधिकारियों को आवारा कुत्तों के पुनर्वास के लिए नीति बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया है. जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच ने इसे नीतिगत निर्णय बताया है.
कोर्ट ने मामले को दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव के पास भेज दिया है. ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संस्थागत स्तर पर आवारा कुत्तों के पुर्नवास के लिए प्रावधान किए जाए. ताकि आवारा कुत्तों का पुनर्वास किया जा सके और उन्हें सार्वजनिक सड़कों और गलियों से चरणबद्ध तरीके से हटाया जा सके.
कोर्ट ने मुख्य सचिव से कहा है कि वे सभी संबंधित हितधारकों की एक बैठक बुलाएं, जिससे यह नीतिगत निर्णय लिया जा सके कि सड़कों और पार्कों में घूमने वाले आवारा कुत्तों को आखिरकार कैसे हराया जाए, उनका पुनर्वास किया जाए और उन्हें संस्थागत आश्रय में रखा जाए.

बता दें कि इससे पहले याचिकाकर्ता के वकील दृष्टिबाधित अधिवक्ता राहुल बजाज ने कहा था कि हमलों के अलावा, याचिका में विकलांग व्यक्तियों द्वारा चिकित्सा या सेवा पशुओं के उपयोग के लिए सक्षम ढांचे की कमी को भी उजागर किया गया है.
बजाज ने कहा था कि पशु जन्म नियंत्रण नियम विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन करते है, क्योंकि वे विकलांग पर आवारा पशुओं के हमले के मुद्दे को संबोधित करने में विफल रहते हैं, जो खुद का बचाव करने में असमर्थ है. उन्होंने कहा था कि दृष्टिबाधित व्यक्तियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सफेद छड़ी एक छड़ी जैसी होती है जिसे जानवर खतरे के रूप में देखते है और इसलिए हमला करते है.
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