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मीरवाइज मौलवी फारूकी हत्या मामला, अयूब डार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 15 जुलाई को सुनवाई

1990 में मीरवाइज मौलवी फारूकी की हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हिजबुल आतंकी अयूब डार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा. इस केस में 5 आतंकी शामिल थे, जिनमें से दो मारे गए और दो हाल ही में गिरफ्तार हुए.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट.

मीरवाइज मौलवी फारूकी की हत्या के मामले में लिप्त हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी अयूब डार की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा. अयूब डार श्रीनगर जेल में बंद है. निचली अदालत से उसे आजीवन कारावास की सजा सुना रखा है.

इस हत्याकांड में 5 आतंकवादी शामिल थे. इसमें से दो आतंकवादियों को 33 साल बाद एनआईए ने जावेद अहमद भट और जहूर भट को गिरफ्तार किया था. जबकि दो आतंकवादी अब्दुल्ला बांगरू और उसका सहयोगी रहमान शिगन सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे जा चुके है.

21 मई 1990 को मीरवाइज मौलवी फारूकी की हत्या हुई थी. पुलिस के मुताबिक हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने फारूक शाह को इस लिए मार डाला था, क्योंकि उन्हें मीरवाइज पर शांतिप्रिय और भारतीय एजेंट होने का शक था. फारूक ऑल जम्मू एंड कश्मीर.अवामी एक्शन कमेटी के अध्यक्ष थे.

हत्या के बाद श्रीनगर में एक मामला दर्ज किया गया था और 11 जून 1990 को इसकी जांच सीबीआई को सौप दी गई थी. जांच में पता चला था कि हत्या की योजना हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर अब्दुल्ला बांगरू और अब्दुल रहमान शिगन ने बनाई थी.

कांड को अंजाम हिजबुल मुजाहिदीन के गुर्गों अयूब डार, जावेद अहमद भट और जहूर भट ने दिया था. बता दें कि मीरवाइज का परिवार दक्षिण कश्मीर के त्राल में रहने वाले एक धर्मोपदेश वैज सिद्दिकुल्लाह का बंसज है. उनके बेटे मीरवाइज अब्दुल सलाम लगभग 200 साल पहले श्रीनगर चले गए और परिवार कलामदानपोरा और बाद में राजौरी कदल बस गए.

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-भारत एक्सप्रेस 



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