सुप्रीम कोर्ट ने 3558 करोड़ के घोटाले के आरोप में गिरफ्तार आरिफ निसार को राहत देने से इनकार कर दिया है. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने निसार की ओर से दायर जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अस्पताल में भर्ती होने की कोई जरूरत नही हैं. आरिफ निसार ने चिकित्सीय आधार पर अंतरिम जमानत देने की कोर्ट से गुहार लगाई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों की ओर से अस्पताल में भर्ती की कोई सिफारिश नही की गई है. लेकिन कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि भविष्य में डॉक्टर भर्ती कराने की सिफारिश करते हैं तो वह हाई कोर्ट का रुख कर सकता है. निसार Vuenow Marketing Services Ltd से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्य आरोपियों में से एक है.
भविष्य में हाई कोर्ट जा सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
अंतरिम जमानत पर सुनवाई के दौरान निसार के वकील ने कहा कि दाहिनी आंख की रोशनी बचाने के लिए उन्हें एक इंजेक्शन और सर्जरी की आवश्यकता है. बता दें कि इसी मामले में ईडी द्वारा जारी लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) के आधार पर कंपनी के सीईओ सुखविंदर सिंह खरौर और उनकी पत्नी डिंपल खरौर को आईजीआई एयर पोर्ट से गिरफ्तार किया है.
इस घोटाले का ये मास्टरमाइंड है. मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अपने करीबी सहयोगियों के साथ मिलकर हजारों करोड़ रुपये के क्लाउड पार्टिकल घोटाले को अंजाम दिया है. जहां निवेशकों की मेहनत की कमाई को आरोपी व्यक्तियों ने अपने निजी लाभ के लिए हड़प लिया.
ईडी ने कहा कि वास्तव में किसी भी क्लाइंट से कोई किराया नहीं मिला, जिनसे कथित रूप से क्लाउड पार्टिकल्स (सर्वर) किराए पर लेने की बात कही गई थी. ईडी द्वारा दर्ज मामले के मुताबिक आरोपी आरिफ निसार के ZIPL में 75 फीसदी हिस्सेदारी है. इस घोटाले के मास्टरमाइंड सुखविंदर सिंह खरौर के करीबी सहयोगी है.
ये भी पढ़ें: Ahmedabad Plane Crash: अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट क्रैश, सुप्रीम कोर्ट ने जताया शोक
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
