सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक पुलिस की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई को स्वीकार कर लिया है, जिसमें हत्या के एक आरोपी की रिमांड खारिज करने के कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है. जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए इस मामले को विचार योग्य माना है.
कोर्ट ने 18 जुलाई को अगली सुनवाई की तारीख तय की है. यह मामला हासन जिले में 17 फरवरी 2023 को हुई हत्या से जुड़ा है, जिसमें आरोपी को गिरफ्तार किया गया था.
17 अप्रैल को कर्नाटक हाई कोर्ट ने अधीनस्थ अदालत के 17 फरवरी 2023 के आदेश को खारिज कर आरोपी को कुछ शर्तों के साथ रिहा करने का निर्देश दिया था. पुलिस ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने तर्क दिया कि हाई कोर्ट में लंबित कई मामलों में इस फैसले को मिसाल के रूप में देखा जा सकता है, जिससे कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. कोर्ट ने जवाब में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश की प्रति हाई कोर्ट को दिखाई जानी चाहिए और सभी को इसके लिए इंतजार करना होगा.
सुप्रीम कोर्ट अब इस बात पर विचार करेगा कि क्या प्रत्येक मामले में, खासकर आईपीसी के तहत अपराधों में, गिरफ्तारी से पहले या बाद में इसके आधार बताना अनिवार्य है. साथ ही, यह भी जांच होगी कि क्या अपवादस्वरूप मामलों में, जहां तत्काल गिरफ्तारी की जरूरत हो और आधार बताना संभव न हो, तो सीआरपीसी की धारा 50 के प्रावधानों का पालन न होने पर गिरफ्तारी को अवैध माना जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले का अंतिम नतीजे पर असर पड़ेगा.
यह मामला न केवल आरोपी की रिहाई बल्कि पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन को लेकर भी महत्वपूर्ण है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला भविष्य में गिरफ्तारी और रिमांड की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है.
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