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ओरिएंटल इंश्योरेंस घोटाले में सीबीआई कोर्ट पटना का बड़ा फैसला: तीन दोषियों को तीन साल की कठोर कैद, ₹67,000 का जुर्माना

सीबीआई ने 30 सितंबर 2005 को इस मामले में छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, जिनमें तीन — शिव शंकर गुप्ता (तत्कालीन शाखा प्रबंधक, ओआईसीएल, सहरसा), नरेंद्र कुमार मिश्रा और मोहन मिश्रा — मुकदमे की प्रक्रिया के दौरान ही दिवंगत हो गए.

CBI Court Patna

सीबीआई की विशेष अदालत संख्या-1, पटना ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (OICL) में हुए बीमा धोखाधड़ी मामले में आज तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल की कठोर कारावास (RI) की सजा सुनाई है. इसके साथ ही अदालत ने दोषियों पर कुल ₹67,000 का जुर्माना भी लगाया है. सजा पाने वालों में शामिल हैं— अशोक कुमार (तत्कालीन सहायक प्रशासनिक अधिकारी, OICL, डिवीजन ऑफिस-II, बैंक रोड, जैतपुर कोठी, पटना), अमरेन्द्र कुमार मिश्रा (तत्कालीन सहायक, OICL, डिवीजन ऑफिस, पूर्णिया, बिहार) और समीर कांत झा (बीमा एजेंट).

यह मामला सीबीआई ने 3 मई 2005 को दर्ज किया था. एफआईआर में कुल पांच आरोपियों को नामजद किया गया था, जिनमें तत्कालीन शाखा प्रबंधक, ओआईसीएल, सहरसा (अब दिवंगत), अशोक कुमार, नरेंद्र कुमार मिश्रा (तत्कालीन डिवीजन ऑफिसर, ओआईसीएल, सहरसा – अब दिवंगत), अमरेन्द्र कुमार मिश्रा और मोहन मिश्रा (निजी व्यक्ति – अब दिवंगत) शामिल थे. आरोप था कि इन सभी ने मिलकर ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को ₹50,000 की चपत लगाने के लिए फर्जी पशु बीमा पॉलिसी बनाई थी.

कंपनी को ₹50,000 का हुआ था नुकसान

जांच के दौरान यह सामने आया कि सहरसा शाखा के तत्कालीन डिवीजन ऑफिसर और अशोक कुमार ने एक पूर्व विधायक (सुपौल) और एक अन्य व्यक्ति के नाम पर फर्जी कागजात के आधार पर पशु बीमा पॉलिसी जारी की, जिससे कंपनी को ₹50,000 का नुकसान हुआ.

6 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर

सीबीआई ने 30 सितंबर 2005 को इस मामले में छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, जिनमें तीन — शिव शंकर गुप्ता (तत्कालीन शाखा प्रबंधक, ओआईसीएल, सहरसा), नरेंद्र कुमार मिश्रा और मोहन मिश्रा — मुकदमे की प्रक्रिया के दौरान ही दिवंगत हो गए.

मामले की लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने शेष तीन आरोपियों को दोषी करार दिया और उन्हें तीन-तीन साल की कठोर कारावास की सजा के साथ जुर्माना भी लगाया. अदालत के इस फैसले को बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता बनाए रखने और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

– भारत एक्सप्रेस



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