Priyadarshini Mattoo Murder Case: कानून की छात्रा प्रियदर्शिनी मट्टू हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे संतोष कुमार सिंह को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने समय पूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस संजीव नरूला की बेंच ने यह फैसला दिया है. इससे पहले समीक्षा बोर्ड ने दोषी संतोष कुमार सिंह की समयपूर्व रिहाई की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दिया था.
25 साल की सजा काट चुका आरोपी
संतोष कुमार सिंह ने 1996 में कानून की छात्रा प्रियदर्शिनी मट्टू से दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी थी. आरोपी द्वारा दायर याचिका में दिल्ली के कारागारों के सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) द्वारा 21 अक्टूबर 2021 को हुई समीक्षा बैठक में की गई सिफारिश को रद्द करने की मांग किया गया था.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मोहित माथुर ने कोर्ट को बताया कि संतोष कुमार सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. वह 25 साल की छूट काट चुका है, लिहाजा समय पूर्व रिहा किया जाए, साथ ही समीक्षा बोर्ड की फैसले को रद्द किया जाए.
याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी कहा कि उनके मुवक्किल का आचरण संतोषजनक है, जो सुधार का संकेत देता है और भविष्य में अपराध करने की उसकी सारी आशंकाएं खत्म हो गई है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनका मुवक्किल समाज का एक उपयोगी सदस्य होगा और पिछले कई सालों से वह जेल में रह रहा है.
आरोपी को निचली अदालत से मिली थी राहत
बता दें कि संतोष कुमार सिंह ने 1999 में निचली अदालत ने बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ मृतका के परिजनों ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसपर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने 27 अक्टूबर 2006 को रेप और हत्या का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी.
इस फैसले के खिलाफ संतोष कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसपर सभी पक्षों की जिरह के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2010 में संतोष कुमार सिंह की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए, फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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