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सुप्रीम कोर्ट ने सिमी पर प्रतिबंध बढ़ाने के खिलाफ याचिका खारिज की, कट्टरपंथी गतिविधियों का हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने सिमी पर पांच साल का प्रतिबंध बढ़ाने के न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि सिमी युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ रहा है.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट.

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक न्यायाधिकरण द्वारा स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है. न्यायाधिकरण ने सिमी पर लगाए गए प्रतिबंध को पांच साल के लिए बढ़ा दिया था. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ता की संवैधानिकता पर सवाल उठाते हुए याचिका को खारिज कर दिया है.

यह याचिका हुमाम अहमद सिद्धिकी की ओर से दायर की गई थी. सिद्धिकी ने केंद्र सरकार के 29 जनवरी 2024 के आदेश को बरकरार रखने के फैसले को चुनौती दी थी. सरकार ने यह फैसला गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम 1967 के तहत लिया गया, जिसके बाद एक न्यायाधिकरण का गठन भी किया गया.

सिमी पर पहली बार 2001 में लगा था प्रतिबंध

2001 में पहली बार सिमी को अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने प्रतिबंधित किया था. तब से इस संगठन पर लगाया गया प्रतिबंध.समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है. यूएपीए ट्रिब्यूनल ने साल 2024 में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया पर भारत सरकार के प्रतिबंध को सही ठहराया था. ट्रिब्यूनल ने कहा था, सिमी युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ रहा है और फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन के जरिये सक्रिय है.

बता दें कि सिमी की स्थापना 25 अप्रैल 1977 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हुई थी. इस संगठन को शुरुआत में युवाओं और छात्रों को केंद्र में रखकर, जमात-ए-इस्लामी-हिंद की विचारधारा से प्रेरित मानते हुए गठित किया गया था. हालांकि 1993 में संगठन ने खुद को जमात से अलग घोषित कर स्वतंत्र पहचान बना ली.

31 जनवरी 2019 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सिमी पर पाबंदी को 5 साल के लिए बढ़ा दिया. गृह मंत्रालय ने सिमी को 58 वारदातों में शामिल बताया गया था. इसमें बेंगलुरू के चिन्नास्वामी स्टेडियम में 2014 में हुए ब्लास्ट और 2017 में बोधगया में हुए धमाके जैसे मामले शामिल हैं.

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-भारत एक्सपेस 



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