पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की गई है. मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने सीजेआई बी आर गवई को बताया कि यह पुनर्विचार याचिका कक्षा 9 से 12 तक के ईमानदार शिक्षकों की ओर से दाखिल की गई है.
नई भर्तियों से पहले सुनवाई की मांग
उन्होंने कहा कि सितंबर से नई भर्तियां शुरू हो रही है, लिहाजा दायर पुनर्विचार याचिका पर जल्द सुनवाई कर ली जाए. कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए 25000 से अधिक शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं. इससे पहले कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील से पूछा था कि सार्वजनिक नौकरी बहुत कम है. अगर जनता का विश्वास चला गया तो कुछ नही बचेगा. यह व्यवस्थागत धोखाधड़ी है. सरकार नौकरियां बेहद कम है और उन्हें समाजिक गतिशीलता के रूप में देखा जाता है.
अगर उनकी नियुक्तियों को भी बदनाम कर दिया जाए तो सिस्टम में क्या रह जाएगा. लोग विश्वास खो देंगे. आप इसे कैसे स्वीकार करेंगे. कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार के पास यह दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है कि डेटा उसके अधिकारियों द्वारा बनाए रखा गया था और इसकी उपलब्धता के बारे में पूछा गया था. कोर्ट ने राज्य सरकार के वकीलों से कहा था को या तो आपके पास देता है या आपके पास नहीं है.
क्या सभी नियुक्तियां अवैध थीं?- कोर्ट
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील ने कोलकाता हाइकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पूछा था कि क्या इस तरह के आदेश को कायम रखा जा सकता है. उन्होंने तर्क दिया था कि यह सीबीआई का भी मामला नहीं है कि सभी 25000 नियुक्तियां अवैध है.
वही स्कूल सेवा आयोग का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने तर्क दिया था कि हाइकोर्ट की पीठ के पास नौकरियां रद्द करने का अधिकार क्षेत्र नही था, और उसके इस मामले में शीर्ष अदालत के फैसलों के विपरीत थे.
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भारत एक्सप्रेस
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