सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के कोरबा में डीएमएफ घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद एनजीओ उदगम सेवा समिति के सचिव मनोज कुमार द्विवेदी की ओर से दायर जमानत याचिका पर ईडी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
कोर्ट ने ईडी से चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि हमें बताएं कि यह कौन सा घोटाला है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बहुत सारे घोटाले होते हैं. इसपर मनोज कुमार द्विवेदी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है.
ईडी और ईओडब्ल्यू कर रही जांच
मनोज कुमार द्विवेदी पर आरोप है कि उसने अपनी बनाई एनजीओ में डीएमएफ फंड को हासिल किया. जिसमें से कुछ पैसे कमीशन के तौर पर तत्कालीन आईएएस रानू साहू तक पहुचाया था और वे जिस एनजीओ में सचिव था. उसके एनजीओ को कई ठेके मिले थे. इस मामले में ईडी और ईओडब्ल्यू दोनों जांच कर रही है. ईडी जांच में पता चला कि 2021-22 और 2022-23 में मनोज कुमार द्विवेदी ने निलंबित आईएएस रानू साहू और अन्य अधिकारियों से मिलीभगत की. ईडी के मुताबिक अधिकारियों को राशि का 42 फीसदी तक कमीशन दिया था.
धारा 420 और 120बी के तहत केस दर्ज
ईडी की रिपोर्ट के आधार पर ईडब्ल्यू ने धारा 120बी, धारा 420 के तहत केस दर्ज किया है. इस केस में यह तथ्य निकाल कर सामने आया है कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड कोरबा के फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमित की गई है. टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुचाया गया है. अबतक की ईडी जांच से पता चला कि मनोज कुमार द्विवेदी डीएमएफ फंड की हेराफेरी कर 17 करोड़ 79 लाख रुपए कमाए. इसमें से 6 करोड़ 57 लाख रुपए अपने पास रख लिए बाकी पैसा अधिकारियों को कमीशन के तौर पर दिया गया.
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