Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने गुजारा भत्ता को लेकर बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि पत्नी को गुजारा भत्ता देने में आनाकानी करने पर वह आपकी आय व संपत्ति को लेकर बतौर गवाह बैंक अधिकारी को बुला सकती है. यह अनुमति दिल्ली हाई कोर्ट ने दिया है.
कोर्ट ने कहा कि पत्नी को गुजारा भत्ता देने में पति का अपनी आय छिपाना असामान्य नहीं है. पत्नी की वास्तविक आय/संपत्ति को लेकर गवाह के रूप में बैंक अधिकारियों को बुलाने की मांग कर सकती है.
जस्टिस रविंदर डुडेजा स्वीकार की याचिका
जस्टिस रविंदर डुडेजा ने याचिकाकर्ता पत्नी की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें उसने पारिवारिक अदालत के सीआरपीसी की धारा की धारा 31के तहत उसके आवेदन को खारिज कर दिया था. पत्नी ने पति की वास्तविक आय की पुष्टि के लिए बैंक अधिकारियों सहित अन्य गवाहों को बुलाने की मांग की थी.
पत्नी ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
पत्नी ने उसी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. अदालत ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता की राशि निर्धारित करने में पति की आय, संपत्ति और साधनों सहित वित्तीय स्थिति प्रासंगिक विचारणीय है. पति के परिवार के सदस्यों के खातों के विवरण तलब करने की मांग करके पत्नी संपत्ति की बिक्री से प्राप्त धन के विचलन की श्रृंखला को रिकॉर्ड में लाना चाहता है, जिससे यह स्थापित किया जा सके कि उक्त धन का उसका गुजारा भत्ता निर्धारण करने में विचार किया जा सके.
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अदालत ने कहा कि धारा 311 अदालत को व्यापक विवेकाधिकार प्रदान करती है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सच्चाई सामने आए और न्याय हो. अगर न्यायोचित निर्णय के लिए साक्ष्य आवश्यक है, तो अदालत को गवाहों को बुलाना चाहिए. यह पत्नी के भरण पोषण के निर्धारण को सीधे प्रभावित करता है. क्योंकि यह जीवन यापन का मामला है, उन्होंने यह कहते हुए पत्नी की याचिका स्वीकार कर ली.
– भारत एक्सप्रेस
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