NIA
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पिछले पांच वर्षों में अपने काम से यह साबित कर दिया है कि संगठित अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों में न्याय दिलाना अब केवल एक उम्मीद नहीं, बल्कि एक ठोस हकीकत है. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में जानकारी दी कि 2020 से 29 जुलाई 2025 तक NIA ने कुल 301 मामलों में चार्जशीट दाखिल की है और इसी अवधि में 97.08% मामलों में दोषसिद्धि दर्ज की गई है.
आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच कुल 103 मामलों में फैसला सुनाया गया, जिनमें 100 में दोषसिद्धि हुई और केवल 3 मामलों में आरोपी बरी हुए. वर्ष 2020, 2021 और 2024 में NIA ने 100% दोषसिद्धि दर हासिल की, जबकि अन्य वर्षों में यह दर 91% से 96% के बीच रही.
इन मामलों में ज्यादातर संगठित अपराध, आतंकवाद, आतंकी फंडिंग और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े गंभीर आरोप शामिल थे. यह आंकड़े न केवल NIA की जांच क्षमता और पेशेवर दक्षता को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि देश में संगठित अपराध के खिलाफ कानूनी ढांचा और रणनीतियां पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुकी हैं.
एक बात बिल्कुल साफ है. 97% दोषसिद्धि दर ने NIA को भारत की सबसे भरोसेमंद और प्रभावी जांच एजेंसियों में शीर्ष पर पहुंचा दिया है, और यह उन अपराधियों के लिए सख्त संदेश है जो कानून से बचने की सोच रखते हैं.
भारत एक्सप्रेस
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