सुप्रीम कोर्ट ने अपनी नाबालिग बेटी से बलात्कार के दोषी पिता की सजा को बरकरार रखा है. कोर्ट ने पिता द्वारा बेटी का किए गए बलात्कार को पारिवारिक भरोसे की बर्बादी करार दिया है. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस संदीप कुमार की पीठ ने पीड़िता को 10:लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है.
कोर्ट ने कहा कि घर सुरक्षित होनी चाहिए, लेकिन जब परिवार के व्यक्ति ही अपराध करें तो उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. कोर्ट ने इस दौरान मनु स्मृति का हवाला देते हुए कहा कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तंत्र देवता, यत्रैतास्तु न पूज्यंते सर्वस्त्राफलाः क्रिया अथार्त जहां स्त्रियों का सम्मान होता है, वहां देवों का वास होता है और जहां उनका अपमान होता है, वहां सभी धर्म और कर्म निष्फल हो जाते हैं.
कोर्ट ने कहा कि यह श्लोक केवल सांस्कृतिक मूल्यों की बात नहीं करता, बल्कि यह संवैधानिक दृष्टि को भी प्रतिबिंबित करता है. कोर्ट ने आरोपी पिता की ओर से दायर जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि दोषी को बिना किसी रियायत के सजा मिलनी चाहिए. इसके प्रति नरमी दिखाई गई तो यह न्याय के साथ धोखा होगा और कमजोर बच्चों की सुरक्षा का अधिकार खत्म हो जाएगा.
बता दें कि यह मामला हिमाचल प्रदेश का है. जहां एक पिता ने अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ बार-बार बलात्कार किया और उसे धमकाया. निचली अदालत ने इस मामले में पिता को भारतीय दंड संहिता की धारा 506 (आपराधिक धमकी) और पॉक्सो अधिनियम 2012की धारा 6 (गंभीर यौन अपराध)के तहत दोषी ठहराया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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